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इंदौर: अस्पताल में बेड नहीं, बाहर पिता की उखड़ती सांसें, जान बचाने की गुहार लगाती रही बेटी

मध्य प्रदेश के इंदौर में कई भयावह मंजर देखने को मिल रहे हैं. यहां एक बेटी अपने बीमार पिता को अस्पताल के बाहर लेकर खड़ी रही, लेकिन ना बेड है और ना ही इलाज की कोई उम्मीद दिख रही है, ऐसे में रो-रो कर उस बेटी का बुरा हाल है.

कोरोना के कारण देश में हाहाकार (फाइल फोटो: PTI) कोरोना के कारण देश में हाहाकार (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना वायरस का कहर हर जगह फैला
  • इंदौर के अस्पतालों में बेड्स की कमी

कोरोना वायरस की नई लहर कितनी खतरनाक है, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है. एक ओर सड़कों पर लोगों की भीड़ है तो दूसरी तरफ हर दिन कोरोना के केस का बढ़ता हुआ आंकड़ा है. ये नई लहर फिर से उस मंजर को जिंदा करती दिख रही है, जो पिछले साल पूरे देश ने भुगता है. मध्य प्रदेश के इंदौर में कई भयावह मंजर देखने को मिल रहे हैं. यहां एक बेटी अपने बीमार पिता को अस्पताल के बाहर लेकर खड़ी रही, लेकिन ना बेड है और ना ही इलाज की कोई उम्मीद दिख रही है, ऐसे में रो-रो कर उस बेटी का बुरा हाल है. ये सिर्फ किसी एक की कहानी नहीं है, बल्कि हर ओर यही दर्द पसरा है. 

मध्य प्रदेश के इंदौर में नए नवेले अस्पताल में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. यहां महामारी की दूसरी लहर अपना कहर बरपा रही है. ऐसी भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो इंसान की रूह को कंपा दे. इसी अस्पताल के बाहर एक युवती जो कोरोना से संक्रमित अपने पिता को भर्ती कराने के लिए लाई थी. लेकिन अस्पताल में कोई बेड खाली नहीं था, इसलिए उसे बाहर घंटों इंतजार करना पड़ा. 

इसी इंतज़ार के बीच एक वक्त ऐसा आया, जब लगा कि पिता की सांस थमने ही वाली है. उस बेटी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया, मौत से जंग लड़ रहे पिता को पानी पिलाने की कोशिश की. लेकिन इस मंजर के बीच कोई मदद नहीं मिल सकी.

सिर्फ एक नहीं, हर मामले में यही दर्द...
ऐसा ही कुछ द्रविड़ नगर के दीपेश के साथ हुआ, जो अपने कोरोना पीड़ित पिता को एम्बुलेंस में लेकर अस्पताल पहुंचा था. दीपेश के पिता को जिस एम्बुलेंस में लाया गया, उसमें कोई सुविधा नहीं थी. यानी एक बुजुर्ग को उसके नसीब पर ही छोड़ दिया गया था.

महालक्ष्मी नगर से एक युवक अपने परिजन को लेकर अस्पताल पहुंचा तो कोई बेड खाली नहीं मिला. युवक का कहना है कि एक अन्य अस्पताल में भी बेड नहीं है, यहां भी खाली बेड होने की बात कह रहे हैं. अब दर-दर की ठोकर खाने के बाद वो युवक अपने परिजन को अस्पताल के बाहर ही लेकर खड़ा रहा.

अस्पतालों में बेड्स ना होने के कारण मरीज़ों को बाहर ही इंतजार करना पड़ रहा है. ऐसे में कुछ मरीज़ तो इंतजार करते करते ही अपना दम तोड़ गए. यहां इंदौर में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अमित के मुताबिक, 6878 में से 4391 बेड्स भरे हैं. आईसीयू बेड्स भी 80 फीसदी तक भर चुके हैं. 

बता दें कि कोरोना के महासंकट के बीच इंदौर एक नया एपिसेंटर बनकर उभरा है. सिर्फ इंदौर में ही इस वक्त 7 हज़ार से अधिक एक्टिव केस हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 

(रिपोर्ट: धर्मेंद्र शर्मा)

 

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