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गुजरात: कोरोना का खौफ! श्मशान घाट से अस्थियां तक नहीं ले जा रहे लोग, अंतिम संस्कार के लिए लगी लाइनें

राजकोट मे वैसे तो चार श्मशान घाट हैं, पर सबसे बडा श्मशान घाट रामनाथ परा है. इसकी बात करें तो यहां अंतिम संस्कार के बाद पिछले तीन महीनों से एक हजार से ज्यादा अस्थियां ऐसी हैं, जिन्हें कोई लेने नहीं आया. 

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजकोट में अंतिम संस्कार के लिए लगी लाइनें
  • श्मशान घाट से अस्थियां तक नहीं ले गए लोग
  • कोरोना के चलते लोगों में खौफ

गुजरात एक बार फिर कोरोना के कहर से बेहाल है. यहां कोरोना के हजारों केस हर रोज दर्ज हो रहे हैं. सैकड़ों लोग प्रतिदिन अपनी जान गंवा रहे हैं. हालात ऐसे हो चले हैं कि राजकोट में कोविड मरीज को अस्पताल में बेड मिलना मुश्किल हो गया है. वहीं श्मशान मे अंतिम संस्कार के लिये भी घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है. कई जगह तो अंतिम संस्कार हो जाने के बाद परिवार वाले अस्थियां ही नहीं ले जा रहे. 

रामनाथ परा श्मशान संचालक श्याम पानखानिया कहते हैं कि श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिये लाइन लग रही है. आलम यह है कि अंतिम संस्कार हो जाने के बाद परिवार के सदस्य डर के मारे अस्थियां भी लेने नहीं ले जा रहे.  

बताया गया कि राजकोट में जिस तरह से कोरोना केस बढ रहे हैं, उसको लेकर प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा. कहीं श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिये लाइन लग रही है तो कहीं अंतिम संस्कार हो जाने के बाद परिवार वाले अस्थियां ही नहीं ले जा रहे. 

राजकोट में वैसे तो चार श्मशान घाट हैं, पर सबसे बडा श्मशान घाट रामनाथ परा है. इसकी बात करें तो यहां अंतिम संस्कार के बाद पिछले तीन महीनों से एक हजार से ज्यादा अस्थियां ऐसी हैं, जिन्हें कोई लेने नहीं आया. 

एक हजार से ज्यादा अस्थियां रखी हैं

कोरोना का डर इस कदर है कि लोग अस्पताल या श्मशान की ओर जाने से बच रहे हैं. 2020 में रामनाथ परा श्मशान घाट के लोगों ने चार हजार से ज्यादा अस्थियां हरिद्वार में विधि विधान से खुद विसर्जित कीं. वहीं 2021 मे पिछले तीन महीनों में एक हजार से ज्यादा अस्थियां अभी तक कोई लेने नहीं आया . 

राजकोट से तेजस की रिपोर्ट 

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