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कोरोना होने पर फेफड़े के इंफेक्शन में कारगर है रेमडेसिविर इंजेक्शन, सूरत इंदौर में खरीदने के लिए लंबी लाइन

कोरोना जैसी जानलेवा महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है. कोरोना की वजह से फेफड़ों में इंफेक्शन होता है और फिर मरीज को निमोनिया हो जाता है. रेमडेसिविर इंजेक्शन फेफड़े के इंफेक्शन से लोगों को बचाता है.

सूरत में रेमडेसिवर इंजेक्शन खरीदने के लिए कतार में लगे लोग (फोटो-आजतक) सूरत में रेमडेसिवर इंजेक्शन खरीदने के लिए कतार में लगे लोग (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नांदेड़ में महंगे दाम पर बेचने पर 4 गिरफ्तार
  • रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए लंबी लाइनें
  • कई शहरों में रेमडेसिविर इंजेक्शन की शॉर्टेज

देश में कोरोना के केस एक बार फिर लगातार बढ़ रहे हैं. कोरोना की यह दूसरी लहर ज्यादा घातक मानी जा रही है. गुरुवार को सवा लाख नए केस रिपोर्ट किए गए हैं. कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू को फिर से लागू कर दिया गया है, कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है. इस बीच एक बात और सामने आई है कि देश के कुछ जिलों में रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए दवा दुकानों पर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं.

इसलिए है रेमडेसिविर की भारी डिमांड

कोरोना जैसी जानलेवा महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है. कोरोना की वजह से फेफड़ों में इंफेक्शन होता है और फिर मरीज को निमोनिया हो जाता है. रेमडेसिविर इंजेक्शन फेफड़े के इंफेक्शन से लोगों को बचाता है. फेफड़े में इंफेक्शन के आधार पर रेमडेसिविर के इंजेक्शन दिए जाते हैं. ज्यादा गंभीर स्थिति में एक मरीज को 6 इंजेक्शन तक लगाने पड़ते हैं.

यही वजह से रेमडेसिविर की भारी डिमांड है. दरअसल, जो मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं उनके फेफड़े में इंफेक्शन काफी बढ़ चुका होता है. जिस वजह से उन्हें रेमडेसिविर के कई इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं.

यहां आपको यह भी बता दें कि भारत में रेमडेसिविर इंजेक्शन कई कंपनियां बना रही हैं. जिनमें सबसे महंगी इंजेक्शन करीब 5400 रुपये और सबसे सस्ती इंजेक्शन 899 रुपये की है.

सूरत में लगी लंबी कतार

गुजरात के सूरत शहर में गुरुवार को कोरोना से संक्रमित मरीजों के परिजन सिविल हॉस्पिटल पर रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए लंबी कतार में खड़े नजर आए. इंजेक्शन हासिल करने के लिए ये लोग कई घंटों लाइन में लगे रहे.

इंजेक्शन मिलने के बाद आशीष ठाकुर ने आजतक की टीम को बताया कि वो अपने बहनोई के लिए इंजेक्शन लेने आए थे. दो-तीन घंटे लाइन में लगे रहने के बाद उन्हें इंजेक्शन मिल पाया.

प्रशांत गुजराती नाम के एक अन्य युवक ने कहा कि मुझे अपने पिता के लिए इंजेक्शन की 6 डोज लेनी है. कई घंटों से खड़ा हूं लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है, कितनी डोज मिल पाएगी इसका भी कुछ पता नहीं है. विस्मय ने भी बताया कि वे अपने ससुर, साले और भाई तीनों के लिए इंजेक्शन लेने आए हैं. दो घंटे से ज्यादा टाइम से लाइन में लगे हैं. अभी हमें ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत है लेकिन यहां लोगों को एक-दो इंजेक्शन ही दे रहे हैं.

इंदौर के दवा बाजार में भी दिखी भारी भीड़

रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए इंदौर के दवा बाजार में गुरुवार को भारी भीड़ नजर आई. इंजेक्शन लेने पहुंचे लोगों ने बताया कि शटर बंद करके सिर्फ पांच लोगों को टोकन दिए जा रहे हैं. लोगों की शिकायत थी कि कोई मदद नहीं कर रहा है. यहां लोग ऐसे सट-सट के खड़े हैं कि हम ही लोग बीमार हो जाएंगे.

लाइन में लगे एक युवक का कहना था कि मरीज को हर दिन एक इंजेक्शन लगने हैं. सुबह 8 बजे से 11 बजे तक लाइन में लगा था लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला फिर बाद में पता चला कि 3 बजे नया स्टॉक आया है तो फिर से लाइन में आकर लग गया हूं.

रेमडेसिविर इंजेक्शन

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हम लोग सुबह से खड़े हैं, दुकानदार कभी बंद करता है कभी चालू करता है. बार-बार टाइम बदलते हैं. इंजेक्शन नहीं दे रहे हैं. पुलिस परेशान कर रही है कि भीड़ कम करो नहीं तो चालान बना देंगे. हमारे लिए पानी की भी व्यवस्था नहीं है. हम परेशान हो रहे हैं. कोई सुनने वाला नहीं है.

कलेक्टर ने जारी किए आदेश ताकि न हो कालाबाजारी

इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोपों के बीच इसे रोकने के लिए इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने आदेश दिया है कि इंजेक्शन को आधार और फोटो आईडी के आधार पर ही दिया जाएगा. इसके साथ ही लोगों को पॉजिटिव रिपोर्ट भी दिखानी होगी और डॉक्टर की पर्ची भी जरूरी होगी. स्टॉकिस्ट को कहा गया है कि रोजाना सुबह 11 बजे यह बताना होगा कि डिमांड कितनी हुई, सप्लाई कितनी की. ड्रग इंस्पेक्टर इस बात की मॉनीटरिंग करेंगे कि नियमानुसार ही सप्लाई हो रही है या नहीं.

इंदौर क्लेक्टर मनीष सिंह ने स्वीकारा की इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी है. उन्होंने कहा कि इसके शॉर्टेज की मुख्य वजह है कि महाराष्ट्र और गुजरात में डिमांड बढ़ गई है. क्योंकि उत्पादन करने वाली करीब 10 यूनिट उन प्रदेशों में है.

नांदेड़ में रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहे 4 लोग गिरफ्तार

महाराष्ट्र के नांदेड में कोरोना के केस बढ़े तो रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड भी बढ़ी. जिस वजह से लोगों ने शिकायत करनी शुरू की कि इंजेक्शन की कालाबाजारी हो रही है. कुछ लोग ड्रग विभाग तक भी पहुंचे. जिसके बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

जिला पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार शेवाले और ड्रग विभाग के अधिकारी रोहित राठौड़ ने बता कि एलसीबी पुलिस दस्ते और ड्रग विभाग के संयुक्त दस्ते ने यह कार्रवाई पूरी की है. बताया जा रहा है कि ये लोग 4 हजार रुपये की कीमत के रेमडेसिविर इंजेक्शन को 8-8 हजार रुपये में बेच रहे थे.

(इनपुट-नांदेड से कुंवरचंद मंडले)

 

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