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भोजशाला विवाद: कोर्ट पहुंचा मामला, समर्थकों में उत्साह, शहर में शांति का माहौल

विश्व प्रसिद्ध भोजशाला विवाद पर हिन्दू मुस्लिम पक्ष अपना अपना दावा ठोक रहे हैं और ये मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है. फ़िलहाल याचिका लगाने के बाद अभी हर ओर शांति है.

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भोजशाला फाइल फोटो भोजशाला फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सामान्य दिनों की तरह शहर में चहल-पहल
  • हिन्दू मुस्लिम के लिए आस्था का विषय

बसंत पंचमी जब शुक्रवार को आती है तो यहां कानून व्यवस्था बिगड़ जाती है, क्योंकि उस दिन आर्कोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के आदेश के तहत बसंत पंचमी पर पूरे दिन हिन्दुओं को पूजा करने का अधिकार है. लेकिन शुक्रवार होने के कारण मुस्लिम भी नमाज अता करते हैं. ऐसे में कई बार यहां पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ा है.

भोजशाला का इतिहास
भोजशाला के बारे में कहा जाता है कि इसे राजा भोज ने एक हजार साल पहले संस्कृत के प्रचार प्रसार एवं पठन-पाठन के लिए बनाई थी. लेकिन बाद में बाबा कमाल जो इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए मालवा आए थे उनका आस्ताना भी यहीं है. यह स्थल हिन्दू और मुसलमान दोनों के लिए आस्था और स्वाभिमान का विषय रहा है. लेकिन बुधवार को लगी याचिका के बाद अब भोजशाला आंदोलनकारियों में उत्साह देखते ही बन रहा है. वे यह मान रहे कि अब इसका समाधान निकलेगा, साथ ही जल्द हिन्दू समाज को यह मिल जाएगा.

इधर इस याचिका से हर कोई यह मान रहा है कि अब इस विवाद का समाधान हो जाएगा. ऐसे में उच्च न्यायालय में लगी याचिका को भी इतिहासकार मानते है कि जो भी फैसला आए उसे दोनों समुदाय को सच्चाई के साथ मानना चाहिए.

भोजशाला केवल विरासत स्थल ही नहीं ऐतिहासिक और भारत की पहचान स्थलों में एक है. जहां राजा भोज ने देश के विद्वानों को लेकर ऐसा केन्द्र स्थापित किया था यहां आकर विद्वान साहित्य सृजन कर सके. देश का विकास कर सके, भला कर सके. फिलहाल धार में शांति है. और सामान्य दिनों की तरह शहर में चहल पहल है.

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