खूंटी जिले में मुख्य रूप से मुंडा जनजातियों का प्रभुत्व रहा है. नक्सलवाद यहां की गंभीर समस्या है. खूंटी जिला शैक्षणिक रूप से भी पिछड़ा हुआ है. यहां के आदिवासी ज्यादातर किसान हैं और खेती पर ही निर्भर रहते हैं. खूंटी जिले के जंगलों में नक्सलियों का गढ़ है. इसलिए यह जिला संघर्ष और विद्रोह का पर्याय बन चुका है. कहते हैं कि मुंडा लोगों की परंपरा के मुताबिक छोटानागपुर के राजा मदरा मुंडा ने खुंटकटी गांव की स्थापना की जिसका नाम उन्होंने खूंटी रखा.
एक कहानी यह भी प्रचलित है कि खूंटी का नाम महाभारत की कुंती के नाम से मिला है. कुंती और उनके बेटों पांडवों ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान कुछ समय यहां पर बिताया था. इसका नाम पहले खुंति हुआ बाद में बदलकर खूंटी हो गया. यह जिला जनजातीय है. लेकिन यहां सबसे ज्यादा संख्या में ईसाई धर्म के लोग भी रहते हैं. यहां पर मिशनरी का काफी काम चलता है.
खूंटी में पिछले तीन विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. यहां से भाजपा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा 2005 से जीतते आ रहे हैं. 2014 में इन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के जीदन होरो को 21515 वोटों से हराया था.
खूंटी की आबादी 5.31 लाख, साक्षरता दर 63.86 फीसदी है
2011 की जनगणना के अनुसार खूंटी जिले की कुल आबादी 531,885 है. इनमें से 266,335 पुरुष और 265,550 महिलाएं हैं. जिले के 8.5 फीसदी लोग शहरी और 91.5 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. जिले की साक्षरता दर 63.86 प्रतिशत है. पुरुषों में शिक्षा गर 61.85 और महिलाओं में 45.13 फीसदी है.
खूंटी की जातिगत गणित
खूंटी जिले में 259,984 लोग कामगार हैं. इनमें से 58.9 फीसदी या तो स्थाई रोजगार में हैं या साल में छह महीने से ज्यादा कमाई करते हैं.
खूंटी का सबसे विख्यात पर्यटन स्थल है पंचघाघ झरना. यह पांच झरनों से मिलकर बना है. यह झरना बनई नदी की धारा से बना है. यहां पानी बहुत ऊंचाई से नहीं गिरता लेकिन तेज धार में पानी की गर्जना सुनाई देती है. यहां अंगराबारी शिव मंदिर है. मंदिर में मुख्य शिवलिंग हैं जिसके ऊपर छत नहीं हैं. डोम्बारी बुरू शहीदों का वह स्थान है जहां भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था. विद्रोह के समय यह स्थान खून से लाल हो गया था. उलिहातू गांव यहीं है, इसी गांव में भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था. पास में ही बिरसा डियर पार्क है, जहां आप विभिन्न प्रकार के हिरणों की प्रजातियों को देख सकते हैं. पास में ही है पेरवाघाघ जलप्रपात. पेरवा का मतलब कबूतर और घाघ यानी घर. अब भी माना जाता है कि यहां पर कबूतर झरने के अंदर रहते हैं. इन सबके अलावा रानी झरना और जेल चर्च सर्वदा देखने लायक जगहें हैं.