झारखंड की खूंटी लोकसभा सीट पर 6 मई को पांचवें चरण में वोट डाले गए. इस चरण में कुल 7 राज्यों की 51 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई. खूंटी लोकसभा सीट पर कुल 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि इस चरण की सभी 51 लोकसभा सीटों पर कुल 674 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इस चरण में कुल 64.04 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जबकि खूंटी लोकसभा सीट पर 65.52 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. मतदान के दौरान पोलिंग बूथ के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं.
वहीं, चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए. चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई. अब 23 मई को वोटों की गिनती होगी और उम्मीदवारों के जीत-हार का फैसला होगा. खूंटी लोकसभा सीटे से बीजेपी ने अर्जुन मुंडा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कालीचरण मुंडा को चुनाव मैदान में उतारा है.
इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में झारखंड की खूंटी लोकसभा सीट पर 64.19 फीसदी वोटिंग हुई थी, जबकि इससे भी पहले साल 2009 में इस सीट पर 52.06 फीसद वोट पड़े थे. खूंटी लोकसभा सीट मुख्य रूप से मुंडा जनजातियों के लिए जानी जाती है. बताया जाता है कि छोटानागपुर के राजा मदरा मुंडा के बेटे सेतिया के आठ बेटे थे. उन्होंने ही एक खुंटकटी गांव की स्थापना की थी, जिसे उन्होंने खुंति नाम दिया था, जो बाद में खूंटी हो गया था.
खूंटी लोकसभा सीट से 2014 में बीजेपी के करिया मुंडा ने चुनाव जीता था. उन्होंने जेकेपी के अनोष एक्का को हराया था. करिया मुंडा को 2.69 लाख और अनोष एक्का को 1.76 लाख वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के काली चरण मुंडा को 1.47 लाख वोटों से संतोष करना पड़ा था.
यह संसदीय क्षेत्र क्रांतिकारी नायक बिरसा मुंडा के लिए भी जाना जाता है. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में ब्रिटिशों के खिलाफ लंबे समय तक चला संघर्ष इतिहास में दर्ज है. इस क्षेत्र में अंगराबारी का शिव मंदिर धार्मिक रूप से बेहद लोकप्रिय जगह है. महाशिवरात्री और सावन माह में यहां पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
झारखंड की खूंटी सीट पर शुरुआत में कांग्रेस का कब्जा था. यहां से कांग्रेस के टिकट पर जयपाल सिंह लगातार तीन चुनाव (1952, 1957 और 1962) जीत चुके हैं. साल 1971 में इस सीट से झारखंड पार्टी के निरल इनम होरो ने बाजी मारी थी. साल 1977 में इस सीट पर झारखंड पार्टी का खाता खुला था और उसके टिकट पहली बार करिया मुंडा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. साल 1980 में फिर झारखंड पार्टी के निरल इनम होरो की वापसी हुई थी. साल 1984 में कांग्रेस के सिमोन टिग्ग जीते थे.
इसके बाद बीजेपी के टिकट से करिया मुंडा ने लगातार पांच बार (1989, 1991, 1996, 1998 और 1999) जीत दर्ज की थी. इसके बाद साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सुशीला केरकेता ने जीत हासिल की थी. इसके बाद फिर करिया मुंडा बीजेपी के टिकट पर लगातार दो बार यानी 2009 और 2014 में जीते.
सामाजिक तानाबाना
खूंटी संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सूबे की छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें खरसावन, तमर, तोरपा, खूंटी, कोलेबीरा, सिमडेगा विधानसभा सीटें शामिल हैं. ये सभी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर मतदाताओं की संख्या करीब 11.11 लाख थी. इसमें 5.65 लाख पुरुष और 5.46 लाख महिला मतदाता शामिल हैं.
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