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रसोई से निकलकर सुहाग तक पहुंची गैस संकट की मार, चूड़ी बाजार में मंदी की खनक

रांची के चूड़ी बाजार पर भी गैस संकट का असर दिखने लगा है. सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र फिरोजाबाद में कमर्शियल गैस की कमी से उत्पादन महंगा हो गया है. थोक और खुदरा कीमतें बढ़ने से मांग घटी है और ग्राहक अब केवल जरूरत भर की खरीदारी कर रहे हैं, जबकि लगन सीजन में पहले लोग स्टॉक भी रखते थे.

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चूड़ी बाजार हुआ परेशान.(Photo: Screengrab)
चूड़ी बाजार हुआ परेशान.(Photo: Screengrab)

देशभर में गैस की किल्लत का असर अब सुहाग की निशानी मानी जाने वाली चूड़ियों के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. रांची का चूड़ी बाजार पूर्वी भारत का बड़ा हब माना जाता है, जहां से बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती जिलों तक चूड़ियों की सप्लाई की जाती है. यहां कई बड़े थोक व्यापारी वर्षों से इस कारोबार से जुड़े हैं और व्यापक स्तर पर बाजार को सप्लाई करते हैं.

थोक व्यापारियों के मुताबिक, देश में चूड़ियों का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेंटर फिरोजाबाद है, जहां गैस की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है. कमर्शियल गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण कई यूनिट बंद हो चुकी हैं और जो उत्पादन हो रहा है, उसकी लागत बढ़ गई है. इससे चूड़ियों की सप्लाई महंगी हो गई है.

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रॉ मटेरियल, खासकर गैस की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ी है और इसका असर सीधे बाजारों तक पहुंच रहा है. अब चूड़ियों के दाम बढ़ने से पूरे सप्लाई चेन पर दबाव दिखाई दे रहा है.

थोक से खुदरा तक बढ़ी कीमतों की मार

थोक व्यापारी मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि पहले दो दर्जन चूड़ियों का डिब्बा ₹24 में आता था और वे लगभग 10% मार्जिन पर बेचते थे. अब वही डिब्बा फिरोजाबाद से 10% महंगा आ रहा है और उन्हें ₹28 के डिब्बे पर ₹9 अतिरिक्त लागत पड़ रही है.

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खुदरा विक्रेताओं को अब यही डिब्बा ₹32 तक बेचना पड़ रहा है. रिटेलर को भी अपना मार्जिन चाहिए, लेकिन महंगी चूड़ियां बेचने में उन्हें दिक्कत हो रही है.

लगन के सीजन के बावजूद मांग में कमी देखी जा रही है और ग्राहक केवल जरूरत भर की खरीदारी कर रहे हैं.

खरीदारी के पैटर्न में बड़ा बदलाव

पहले ग्राहक अलग-अलग परिधानों के लिए कई सेट चूड़ियां खरीदते थे और घर में स्टॉक रखते थे. अब महंगाई के कारण अतिरिक्त खरीदारी कम हो गई है. अभी ग्राहक के मन में ये है की महंगा हो गया है, तो अभी बस काम भर ले लो और फिर कल को सस्ता होगा तो  बाद में खरीदेंगे. मतलब बस केवल जरूरत का सामान ग्राहक लेता है और एक्स्ट्रा कुछ भी नहीं खरीदता है.

वहीं, नग वाली चूड़ियों में लगभग 10% से ज्यादा तेजी आई है क्योंकि नग चिपकाने वाले फेविकोल की कीमत दोगुनी हो गई है. कांच की चूड़ियों में एक दर्जन पर ₹3-₹4 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 20 दर्जन के गुच्छे पर ₹35 की बढ़ोतरी से प्रति दर्जन ₹1.5–₹2 का फर्क आया है, जिससे कुल मिलाकर 10–15% तक कीमतें बढ़ गई हैं. 

गैस संकट का व्यापक असर

गैस की कमी का असर पहले फूड आउटलेट्स और घरेलू रसोई पर पड़ा, लेकिन अब यह सुहाग की वस्तुओं तक पहुंच गया है. उत्पादन महंगा होने की लागत सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है. इससे यह हो रहा है कि शादी वाले घर में परिजनों और दुल्हनों की शॉपिंग लिस्ट छोटी हो गई है.

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लगन के कारण लोग जरूरत के मुताबिक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन पहले की तरह स्टॉक रखने की प्रवृत्ति घट गई है.

फिलहाल चूड़ियों की कीमत ₹25 से ₹100 प्रति डिब्बा के बीच है और गैस संकट का असर अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग तरीके से महसूस किया जा रहा है. जाहिर तौर पर इससे आम कस्टमर की परेशानी बढ़ी हुई है.

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