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झारखंड सरकार बोली- टीकाकरण की सुस्त रफ्तार के लिए 'CoWin' जिम्मेदार, SC से की ये अपील

सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि कोविन ऐप की वजह से झारखंड में टीकाकरण अभियान को गति नहीं मिल पा रही है. कोर्ट को बताया गया है कि झारखंड एक पिछड़ा राज्य है और यहां पर सभी के पास स्मॉर्टफोन नहीं है.

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झारखंड सरकार ने कोविन ऐप पर उठाए सवाल ( फोटो-Reuters)
झारखंड सरकार ने कोविन ऐप पर उठाए सवाल ( फोटो-Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झारखंड सरकार ने कोविन ऐप पर उठाए सवाल
  • टीकाकरण की सुस्त रफ्तार का जिम्मेदार
  • अमृतवाहिनी ऐप इस्तेमाल करने की मांग

कोरोना संकट के बीच पूरे देश में टीकाकरण पर खास जोर दिया जा रहा है. कोशिश की जा रही है कि समय रहते देश के ज्यादातर लोगों को टीका लगा दिया जाए. लेकिन अभी तक झारखंड में टीकाकरण की वो रफ्तार देखने को नहीं मिली है. अभी भी राज्य में वैक्सीनेशन का काम धीमी गति से हो रहा है. ऐसे में अब झारखंड सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है और केंद्र की कोविन ऐप पर सवाल उठाए गए हैं.

झारखंड सरकार ने कोविन ऐप पर उठाए सवाल

सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि कोविन ऐप की वजह से झारखंड में टीकाकरण अभियान को गति नहीं मिल पा रही है. कोर्ट को बताया गया है कि झारखंड एक पिछड़ा राज्य है और यहां पर सभी के पास स्मॉर्टफोन नहीं है. इस वजह से जिन लोगों के पास स्मॉर्टफोन नहीं है, वे कोरोना का टीका नहीं लगवा पा रहे हैं. उन्हें खुद को रेजिस्टर करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कोरोना के बढ़ते संकट के बीच राज्य सरकार इसे एक बड़ी बाधा के रूप में देख रही है. 

टीकाकरण की सुस्त रफ्तार के लिए बताया जिम्मेदार

वैसे राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में जानकारी दी गई है कि उनकी अमृतवाहिनी ऐप वैक्सीनेशन के लिए इस्तेमाल में लाई जा सकती है. इस ऐप को दोनों ऑनलाइन और ऑफलाइन अंदाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में स्मॉर्टफोन पर निर्भरता कम हो जाएगी और लोगों को समय रहते कोरोना का टीका लग जाएगा.

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कोर्ट से अपील की गई है कि राज्य सरकार की अमृतवाहिनी ऐप को स्वीकृति प्रदान की जाए और टीकाकरण अभियान में इसका इस्तेमाल हो. सरकार की तरफ से जोर दिया गया है कि उनकी इस ऐप की वजह से राज्य में टीकाकरण की रफ्तार को बढ़ाया जा सकेगा और जल्द ज्यादा लोगों को टीका लग जाएगा.

कोरोना संकट में कैदियों को जेल से आजादी?

वैसे इस समय सुस्त वैक्सीनेशन का असर सिर्फ आम लोगों पर नहीं बल्कि जेल में बंद कैदियों पर भी हो रहा है. इसी वजह से झारखंड के जेल में बढ़ती भीड़ को देखते हुए और करोना संक्रमण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड की विभिन्न जेलों में बंद लगभग 7000 कैदियों को जेल से आजादी मिल सकती है. हालांकि इस बार किसी भी कैदी की सजा को माफ नहीं किया जा रहा है.कैदियों को जमानत और पैरोल पर रिहा किया जायेगा.
 

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झारखंड की कोरोना स्थिति की बात करें तो राज्य में पिछले 24 घंटे में 2925 नए मामले सामने आए हैं, वहीं इस महामारी के आगे 62 लोगों ने दम तोड़ दिया है. बीते कुछ दिनों से मामलों में गिरावट तो देखने को मिल रही है, लेकिन मौत का आंकड़ा अभी भी डराने वाला है. वहीं क्योंकि अभी राज्य में टीकाकरण की रफ्तार भी सुस्त है, ऐसे में खतरा और ज्यादा देखने को मिल रहा है.
 

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