झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश में लातेहार जिले के चंदवा निवासी संजय साहू और उनकी पत्नी अर्चना की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. 16 फरवरी को अपने ढाबे में लगी आग बुझाते समय 41 वर्षीय संजय 65 प्रतिशत तक जल गए थे. रांची के देवकमल अस्पताल में सुधार न होने पर उन्हें दिल्ली शिफ्ट करने के लिए उनकी पत्नी ने जेवर और जमीन गिरवी रखकर व कर्ज लेकर 8 लाख रुपये जुटाए थे.
जब रेडबर्ड एयरवेज के विमान ने संजय को लेकर दिल्ली के लिए उड़ान भरी, तो टेक-ऑफ के तुरंत बाद एटीसी से संपर्क टूट गया और विमान चतरा के जंगलों में क्रैश हो गया.
इस हादसे में संजय और अर्चना सहित 9 लोगों की मौत हो गई. अर्चना ने अपने पति के साथ जीने-मरने का जो वचन दिया था, उसे उन्होंने आखिरी सांस तक निभाया और दोनों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया.
आजीविका बचाने की कोशिश में जल गया था शरीर
16 फरवरी को चंदवा के सरोज नगर स्थित संजय के रोड साइड ढाबे में कथित तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी. अपनी रोजी-रोटी और ढाबे को बचाने की कोशिश में संजय बुरी तरह झुलस गए थे. देवकमल अस्पताल के चीफ प्लास्टिक सर्जन डॉ. अनंत सिन्हा ने बताया कि संजय 65 प्रतिशत बर्न इंजरी के साथ लाए गए थे. परिजनों की मांग पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के हायर मेडिकल सेंटर रेफर किया गया था.
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इलाज के लिए बेचे जेवर और जमीन
संजय के रिश्तेदार सीताराम साहू ने बताया कि दिल्ली के अस्पताल ने भर्ती के लिए 5 लाख रुपये अग्रिम जमा करने को कहा था. एयर एंबुलेंस और इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती थी. अर्चना ने अपने पति की जान बचाने की बेताब कोशिश में अपने गहने गिरवी रख दिए, जमीन बेच दी और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर 8 लाख रुपये जुटाए. लेकिन उनकी यह सारी मेहनत चतरा के जंगलों में विमान के साथ खाक हो गई.
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अनाथ हुए बच्चे और कर्ज का भारी बोझ
संजय और अर्चना की मौत के बाद उनके दो बच्चे अब अनाथ हो गए हैं. माता-पिता को खोने के गम के साथ ही उन पर अब लाखों रुपये के कर्ज का बोझ भी आ गया है. विधानसभा में यह मामला गूंजा, जहां आजसू विधायक निर्मल महतो ने मृतकों के परिवारों के लिए 2-2 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मदद का आश्वासन दिया है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि आचार संहिता के बावजूद सीएम से चर्चा करके मदद का ऐलान किया जाएगा.