जम्मू-कश्मीर में एक्टिव 'सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन' पर बड़ा एक्शन हुआ है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस संस्था के मैनेजमेंट से सारे अधिकार छीन लिए हैं.अब इसका पूरा ऑपरेशनल कंट्रोल एक ऑफिशियल लिक्विडेटर संभालेगा.
यह इमरजेंसी दखल तब हुआ जब मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) की जांच में पता चला कि यह गैर-लाभकारी संस्था राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम कर रही थी. जनता के पैसों की सुरक्षा और अहम सबूतों को बचाए रखने के लिए ऑफिशियल लिक्विडेटर को फाउंडेशन के सभी बैंक अकाउंट, कॉर्पोरेट प्रॉपर्टी और फाइनेंशियल रिकॉर्ड को तुरंत फ्रीज और जब्त करने का आदेश दिया गया है.
कैसे हुआ इस बड़ी साजिश का भंडाफोड़?
जम्मू-कश्मीर की सीआईडी ने 6 मार्च 2026 को एक रिपोर्ट (नंबर CID/TMG/D-3/2026/244-4) दी थी. इस रिपोर्ट में बताया गया कि सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन धोखाधड़ी कर रहा है. यह संस्था अपने नियमों के खिलाफ जाकर देश विरोधी कामों में शामिल है. फाउंडेशन कागजों पर स्कूल और सामाजिक कार्यक्रम चलाने का दावा करता था, लेकिन असल में इसका इस्तेमाल देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए हो रहा था.
जब अधिकारियों ने संस्था के मैनेजमेंट से पूछताछ की, तो उनकी चोरी पकड़ी गई. मैनेजमेंट ने खुद माना कि वे सरकारी जांच से बचने के लिए एक पुराने ट्रस्ट के पीछे अपना वित्तीय रिकॉर्ड छुपा रहे थे.
कोर्ट और मंत्रालय की कड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एमसीए ने बिना समय गंवाए केस सीधे NCLT के सामने रखा. मंत्रालय ने अदालत को बताया कि अगर संस्था के संचालकों को भनक लगी, तो वे सबूत मिटा सकते हैं और फंड भी गायब कर सकते हैं. इस पर ट्रिब्यूनल ने बड़ा कदम उठाया. कोर्ट ने संस्था को बिना कोई एडवांस नोटिस दिए सभी बैंक अकाउंट, संपत्तियां और वित्तीय रिकॉर्ड तुरंत फ्रीज करने के आदेश दे दिए.
सीआईडी की रिपोर्ट मिलने के बाद मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के महानिदेशक ने भी एक कड़ा पत्र जारी किया था. उन्होंने 23 मार्च 2026 को पत्र (फाइल नंबर CL-II-08/13/2026-O/o DGCoA-MCA) के जरिए चंडीगढ़ के क्षेत्रीय निदेशक को निर्देश दिया. इस निर्देश में उन्होंने कानून की धारा 272 के तहत तुरंत कार्रवाई शुरू करने को कहा. उन्होंने यह भी आदेश दिया कि कानून के तहत संस्था के सभी डायरेक्टरों और मुख्य अधिकारियों (KMPs) की निजी संपत्तियों को भी जब्त और फ्रीज करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं.
ऑफिशियल लिक्विडेटर ने अब कोर्ट के आदेशों को लागू करना शुरू कर दिया है. संस्था के पुराने डायरेक्टर्स को हटा दिया गया है. लिक्विडेटर अब उनकी सभी संपत्तियों और फंड की लिस्ट तैयार कर रहा है. पूर्व मैनेजमेंट को अपने सभी काम-काज का पूरा ब्योरा सौंपने के लिए एक डेडलाइन दी गई है.