चंडीगढ़ के IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जांच तेज हो गई है. हरियाणा सरकार ने पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है. इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित लगभग 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर वापस सरकारी खातों में जमा करा दिए गए.
हालांकि, पूरे 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड की जांच अभी जारी है. जानकारी के मुताबिक जिन विभागों के खाते जांच के दायरे में हैं, उनमें विकास एवं पंचायत विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, नगर निगम पंचकूला और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शामिल हैं. इन चारों विभागों के आईएएस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बैंक की चंडीगढ़ शाखा के चार-पांच मध्य और निचले स्तर के कर्मचारियों की बाहरी लोगों के साथ मिलीभगत सामने आई है. बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने निवेशकों के साथ बातचीत में माना कि यह घोटाला कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की सांठगांठ का परिणाम है. बैंक इस मामले में प्रावधान (प्रोविजन) भी करेगा.
जांच एजेंसियों ने चंडीगढ़ और हरियाणा के कई कारोबारियों, रियल एस्टेट फर्मों और रियल्टर्स के खातों को भी संदेह के दायरे में लिया है. इन संदिग्ध खातों से जुड़े करीब 70 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं. हालांकि, अब तक घोटाले का पूरा मोडस ऑपरेंडी स्पष्ट नहीं हो सका है.
सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति चाहे वह बैंक कर्मचारी हो, निजी व्यक्ति या सरकारी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा. एंटी करप्शन ब्यूरो भी समानांतर रूप से जांच में जुटा है. आने वाले दिनों में इस बहुस्तरीय वित्तीय घोटाले से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है.