scorecardresearch
 

गंदा पानी या वजह कुछ और? हरियाणा के इस गांव में 15 दिन में 20 मौतें कैसे

पलवल के छायसा गांव में बीते 15 दिनों में 20 लोगों की मौत से दहशत है. ग्रामीणों के अनुसार पहले बुखार आता है और 48 घंटे में मरीज की जान चली जाती है. पलवल स्वास्थ्य विभाग ने गांव में मेडिकल टीमें तैनात कर जांच, इलाज और पानी के सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है.

Advertisement
X
डॉक्टर वासुदेव गुप्ता ने आजतक से बातचीत में कहा कि मौतों की वजह क्या है, इसका विश्लेषण किया जा रहा है. (Photo: ITG)
डॉक्टर वासुदेव गुप्ता ने आजतक से बातचीत में कहा कि मौतों की वजह क्या है, इसका विश्लेषण किया जा रहा है. (Photo: ITG)

हरियाणा के पलवल जिले के छायसा गांव में बीते 15 दिनों के भीतर 20 लोगों की मौत के बाद दहशत का माहौल है. मरने वालों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हैं. ग्रामीणों का दावा है कि पहले तेज बुखार होता है और फिर 48 घंटे के भीतर मरीज की मौत हो जाती है. जांच में अधिकतर मामलों में लिवर में सूजन या लिवर फेल होने की बात सामने आ रही है.

ग्रामीण मुहम्मद शाहिद ने बताया कि उनके 12 वर्षीय भतीजे को पहले बुखार हुआ. इलाज के लिए पलवल और फिर फरीदाबाद ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसका लिवर पूरी तरह खराब हो चुका है और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई. इसी तरह हकीमुद्दीन के 24 वर्षीय बेटे दिलशाद और शाकिर के 13 वर्षीय बेटे शारिक की भी बुखार के बाद लिवर सूजन से मौत हो गई.

शारिक के मामले में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में लिवर पर सूजन और पेट में पानी भरने की पुष्टि हुई थी. असदुद्दीन ने बताया कि उनके पोते को पहले बुखार हुआ, फिर ब्लड प्रेशर बढ़ा और बाद में डॉक्टरों ने बताया कि उसका लिवर ‘डेड’ हो चुका है. इसके बाद उसकी भी मौत हो गई. गांव में मरने वालों में होमा (18), शारिक (14), जमीला (55), हुफैजा (12), दिलशाद (21), शमशुद्दीन (38), हसन (72), इंद्रावती (70), नसीर (65), असिया (65), सरफराज (48), अतरी (90), पायल (9), हुर्री (20) और गफूंदी (60) शामिल हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: हरियाणा के गांव में 15 दिन में 12 मौतें, हेल्थ टीम ने डाला डेरा, 400 लोगों की कराई गई स्क्रीनिंग

गांव में कैंप कर रहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें

लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में कैंप कर रही हैं. स्वास्थ्य विभाग के डॉ. गोयल ने बताया कि अब तक सैकड़ों लोगों के खून के नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें से 17 लोग हेपेटाइटिस से संक्रमित पाए गए हैं. उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं. डॉक्टर के मुताबिक हेपेटाइटिस के कारणों में दूषित पानी, संक्रमित सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल और यौन संक्रमण शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है.

प्रशासन का कहना है कि 11 फरवरी के बाद कोई नई मौत रिपोर्ट नहीं हुई है. पलवल के उपायुक्त हरिश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. अब तक करीब 1,400 ब्लड सैंपल्स लिए गए हैं, जिनमें 20 लोगों में हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है. गांव में ओपीडी चलाई जा रही है और पानी के सैंपल्स की जांच भी की जा रही है. कुछ झोलाछाप डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जहां एक ही सिरिंज के बार-बार इस्तेमाल की आशंका जताई गई है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'तब तक किसी को अरावली छूने भी नहीं देंगे...', SC ने हरियाणा के जंगल सफारी प्रोजेक्ट को किया रिजेक्ट

लोगों के घरों में वाटर टैंक से सैंपल्स लिए गए 

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने स्वास्थ्य विभाग को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. सरकार ने 12 मौतें होने की बात कही है, वहीं ग्रामीणों का दावा है कि मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से ज्यादा है और गांव में पीने के पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है. पलवल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि 11 फरवरी के बाद से कोई नई मौत दर्ज नहीं की गई है और 2-3 मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि लोगों के घरों में पानी की टंकी से सैंपल्स लिए गए हैं, जिनमें से 6 सैंपल निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरे.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement