हरियाणा के कैथल में आयोजित एक समिति बैठक के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब मंत्री अनिल विज और कैथल एसपी उपासना के बीच एक पुलिसकर्मी के सस्पेंशन को लेकर तीखी बहस हो गई. बैठक में मौजूद अधिकारियों के सामने दोनों के बीच अधिकार क्षेत्र और प्रक्रिया को लेकर खुलकर चर्चा हुई.
जानकारी के मुताबिक करनाल पुलिस में तैनात एएसआई संदीप कुमार पर जमीन विवाद से जुड़ा धोखाधड़ी का आरोप है. आरोप है कि एएसआई संदीप ने एक व्यक्ति से जमीन बेचने के नाम पर करीब 7 लाख रुपये एडवांस लिए थे. बाद में जब जमीन के कागजात गलत पाए गए तो खरीदार ने सौदा रद्द कर पैसे वापस मांगे, लेकिन आरोप है कि संदीप ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया. इसके बाद कैथल के तितरम थाने में मामला दर्ज किया गया.
एसपी और मंत्री में तीखी नोकझोंक
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच की प्रक्रिया धीमी कर दी और मामला करनाल के इकोनॉमिक सेल में ट्रांसफर करा दिया. इस मुद्दे पर कैथल समिति की बैठक में चर्चा हुई.
बैठक के दौरान मंत्री अनिल विज ने एसपी उपासना को निर्देश दिया कि संबंधित पुलिसकर्मी को तुरंत सस्पेंड किया जाए. इस पर एसपी ने स्पष्ट किया कि संबंधित पुलिसकर्मी दूसरे जिले यानी करनाल में तैनात है, इसलिए उनके अधिकार क्षेत्र में उसे सस्पेंड करना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वो केवल उच्च अधिकारियों, जैसे डीआईजी को रिपोर्ट भेज सकती हैं.
दूसरे जिले के पुलिसकर्मी को नहीं कर सकते सस्पेंड: सस्पेंड
इस पर मंत्री विज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि 'पावर नहीं तो यहां से उठ जाओ', उनके आदेश पर कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि एसपी ने नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की बात दोहराई. बाद में स्थिति स्पष्ट होने पर मंत्री ने कहा कि उनके आदेश का हवाला देकर डीआईजी को पत्र भेजा जाए.
पूरे मामले को बाद में गलतफहमी बताया गया. नियमों के अनुसार कोई भी एसपी दूसरे जिले के पुलिसकर्मी को सीधे सस्पेंड नहीं कर सकता. बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई.