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LPG संकट के बीच मजदूरों का पलायन रोकने के लिए शुरू हुई विशेष रसोई, रोज 5 हजार से ज्यादा लोगों को मिल रहा भोजन

सूरत में गैस संकट के बीच श्रमिकों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है. पांडेसरा इंडस्ट्रियल एरिया की एक कैंटीन इन दिनों मजदूरों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है, जहां रोजाना 5 हजार से ज्यादा लोग खाना खा रहे हैं या पार्सल ले जा रहे हैं. पहले यहां 500 से 1500 लोग आते थे, लेकिन गैस की कमी के चलते संख्या तेजी से बढ़ी है.

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सूरत में गैस संकट!(Photo: Sanjay Singh J Rathod/ITG)
सूरत में गैस संकट!(Photo: Sanjay Singh J Rathod/ITG)

गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में गैस संकट के बीच श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. पांडेसरा इंडस्ट्रियल इलाके में एक कैंटीन में इन दिनों भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में मजदूर भोजन के लिए पहुंच रहे हैं. बढ़ती मांग को देखते हुए कैंटीन संचालकों ने भोजन बनाने के संसाधनों को भी बढ़ा दिया है.

पांडेसरा इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले श्रमिक लंबी कतारों में खड़े होकर भोजन ले रहे हैं. यहां दाल, चावल, सब्जी और रोटी जैसे साधारण लेकिन भरपेट भोजन की व्यवस्था की गई है. सामान्य दिनों की तुलना में यहां भीड़ काफी ज्यादा हो गई है.

इस भीड़ का मुख्य कारण घरेलू और कमर्शियल गैस का संकट बताया जा रहा है. जिन लोगों के पास गैस कनेक्शन नहीं है, उन्हें अब कालाबाजारी में भी गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे वे बाहर भोजन करने को मजबूर हो गए हैं.

सूरत

हर दिन 5 हजार से ज्यादा लोगों को मिल रहा भोजन

कैंटीन संचालक जीतूभाई बखरिया ने बताया कि यह रसोई लगभग एक साल पहले शुरू की गई थी. पहले यहां रोजाना 500 से 1500 लोग भोजन करते थे, लेकिन अब यह संख्या तेजी से बढ़कर 5 हजार से ज्यादा हो गई है. लोग यहां भोजन करने के साथ-साथ पार्सल भी ले जा रहे हैं.

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उन्होंने बताया कि पांडेसरा, भटार, भेस्तान और उधना जैसे इलाकों से श्रमिक यहां आ रहे हैं. यह रसोई सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक संचालित की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को भोजन मिल सके.

प्रति व्यक्ति 45 रुपये में भरपेट खाना उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पार्सल के लिए 50 रुपये शुल्क लिया जा रहा है. पार्सल में रोटियों की संख्या 4 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है. संचालकों का कहना है कि उनका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि श्रमिकों की मदद करना है.

पलायन पर असर, श्रमिकों ने बताई मजबूरी

कैंटीन संचालकों के अनुसार, वीविंग इंडस्ट्री के कई कारीगर पहले ही पलायन कर चुके हैं, क्योंकि धागे के दाम बढ़ गए थे. हालांकि, डाइंग और प्रिंटिंग इंडस्ट्री में अभी काम जारी है और भोजन की व्यवस्था होने से पलायन काफी हद तक रुक गया है.

सूरत

वहीं, कैंटीन में भोजन करने आए श्रमिकों ने भी अपनी परेशानी बताई. रंजीत, गोविंद विश्वकर्मा और उमाशंकर दुबे ने बताया कि वे भेस्तान और पांडेसरा जैसे इलाकों से यहां खाना खाने आते हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते से गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. पहले वे घर पर ही खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस की भारी कमी और कालाबाजारी बंद होने के कारण उन्हें इस रसोई का सहारा लेना पड़ रहा है.

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