गुजरात में 2002 में बहुचर्चित नरोदा पाटिया दंगे के मामले के दोषी बजरंग दल के बाबू बजरंगी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत मिल गई है. बाबू बजरंगी ने स्वास्थ्य आधार पर कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी. बजरंगी को 21 साल की सजा दी गई थी. इससे पहले इसी साल जनवरी में नरोदा पाटिया दंगे के मामले में सजा काट रहे चार दोषियों उमेश भाई भारवाड, राजकुमार, हर्षद और प्रकाशभाई राठौड़ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दी गई थी.
नरोदा पाटिया दंगे के मामले में दोषी बाबू बजरंगी ने देश की शीर्ष अदालत में दाखिल अपनी जमानत याचिका में कहा था कि वो शारीरिक रूप से ठीक नहीं है और कुछ वक्त पहले उसकी बाईपास सर्जरी भी हुई है. पिछले साल अप्रैल में गुजरात हाई कोर्ट ने बाबू बजरंगी को दोषी करार देते हुए उसे 21 साल की जेल की सजा सुनाई थी. इससे पहले विशेष अदालत की ओर से बाबू बजरंगी को जिंदगी की आखिरी सांस तक कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने सजा घटाकर 21 साल की जेल कर दी थी.
पिछले साल अप्रैल में गुजरात हाई कोर्ट ने नरोदा पाटिया दंगे मामले में फैसला सुनाते हुए चारों दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई थी. इस नरसंहार में कुल 97 लोग मारे गए और 33 लोग जख्मी हो गए थे. बाबू बजरंगी ने हाई कोर्ट के फैसले को भी चुनौती दी थी.
गुजरात के गोधरा में 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में अज्ञात लोगों की ओर से आग लगा दी गई थी. आग के कारण इस ट्रेन में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की मौत हुई थी. 59 कारसेवकों की मौत के बाद गुजरात में दंगा भड़क उठा और दंगों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे. दंगे को लेकर गुजरात की तत्कालीन मोदी सरकार सवालों के घेरे में आ गई थी. इन्हीं दंगों के दौरान नरोदा पाटिया की घटना भी हुई थी.