गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले 21 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद कुलदीप यादव की रिहाई को लेकर कोई सुनवाई नहीं की, लेकिन उसने एक अहम फैसला सुनाते हुए उनकी बहन को सरकारी नौकरी देने का आदेश दे दिया.
हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक की बहन रेखा यादव को मुआवजे के तौर पर भारत सरकार में नौकरी मिलनी चाहिए. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद रेखा यादव को नौकरी तो मिल जाएगी, लेकिन उनका भाई कुलदीप की भारत वापस कब आएगा इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई.
गुजरात में कुलदीप यादव की बहन रेखा यादव ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उसका भाई पिछले कई साल से पाकिस्तान की जेल में बंद है. भारत सरकार से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें स्वदेश लाने को लेकर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई.
रेखा ने इसके खिलाफ से कुलदीप के लिए मुआवजे की मांग की थी जिस पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नौकरी देने का आदेश दिया.
रेखा के अनुसार, कुलदीप यादव 1994 में अहमदाबाद से नौकरी के लिए कहकर निकले, लेकिन तीन साल तक उनकी कोई खबर नहीं मिली और फिर अचानक 1997 में पाकिस्तान से छूटकर एक मछुआरा उनके घर पहुंचा और उन्होंने कुलदीप का पत्र उनकी मां को दिया. तब परिवार वालों को पता चला कि कुलदीप पाकिस्तान की लाहौर जेल में बंद है.
कुलदीप के पाकिस्तान की जेल में होने की खबर आने के बाद परिजन उसकी रिहाई के लिए कई बार सरकार से अनुरोध किया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. पाकिस्तान ने कुलदीप पर जासूसी का आरोप लगाया है.
कुलदीप के परिजनों का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि उनका बेटा भारतीय कैसे बन गया, जबकि वो ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं था. परिवार को जो अंतिम संदेश सरकार से मिला था वो यही था कि कुलदीप को पाकिस्तान में 25 साल की सजा सुनाई गई है और उसकी रिहाई 2021 में होगी.