जापान ने दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका पर एटम बम गिराया था, गांधी जी की हत्या 30 अक्टूबर 1948 में हुई और एक नया देश इस्लामी इस्लामाबाद बना है और उसकी राजधानी हिन्दुकुश पहाड़ों में है. यही नहीं सभी दक्षिण भारतीय मद्रासी होते हैं. यह "ज्ञान" गुजरात के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जाने वाले सोशल साइंस के टेक्स्ट बुक में है.
ये किताबें छठी से आठवीं तक के 50,000 छात्रों को बांटी जा चुकी है. ये किताबें गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) और गुजरात स्टेट बोर्ड फॉर स्कूल टेक्स्ट बुक्स के एक विशिष्ट पैनल की देख रेख में तैयार किया गया है. ये वही किताबें हैं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवनी छपने वाली थी. बाद में पीएम ने खुद ही इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. अब राज्य सरकार जग गई है और उसने प्राइवेट स्कूलों से शिक्षकों का एक पैनल तैयार किया जिसने इन किताबों की फिर से समीक्षा की और इनमें बदलाव किया.
सूत्रों ने बताया कि नया सत्र शुरू होने के साथ नई और संशोधित किताबें बाजार में आ चुकी हैं. पुरानी किताबों से कुछ ही बच्चों को पढ़ाया गया. इन किताबों में सिर्फ ये ही बातें गलत नहीं थीं. इनके अलावा भी इनमें काफी कुछ गलत था. आठवीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में लिखा हैः पू्र्वी भारत में लोग कपड़े एड़ी के ऊपर पहनते हैं क्योंकि वहां बहुत बारिश होती है. महिलाएं अजीब ढंग से साड़ी पहनती हैं. वहां ज्यादातर लोग लकड़ी और बांस के बने मकानों में रहते हैं.
इसी किताब में लिखा गया है कि इडली और डोसा दक्षिण भारत में प्रसिद्ध हैं. मद्रासी खाना बहुत प्रसिद्ध है. इसमें पुरी की रथ यात्रा को दक्षिण भारत के उत्सवों ओणम और केरल की दीवाली से जोड़ दिया गया है. इन टेक्स्ट बुक में अंग्रेजी को भी नहीं बख्शा गया है और ऊटपटांग भाषा का इस्तेमाल किया गया है.
दरअसल अंग्रेजी की इन किताबों का गुजराती से अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है. यह अनुवाद बहुत ही घटिया है. आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर समीर बड़ुआ ने कहा कि गुजरात में स्कूली किताबें लिखने वाले लोग अक्षम हैं. ज्यादातर किताबें गुजराती में हैं और उनका अनुवाद बहुत ही घटिया है.