गुजरात के अमरेली जिले में करी ढाई साल का शेर एक कुएं में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया. बाद में पोस्टमार्टम के लिए एनिमल केयर सेंटर भेजा गया. शेरों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले इस इलाके में हो रही ऐसी घटनाओं से वन्यजीव प्रेमियों में नाराजगी है.
जानकारी के मुताबिक, यह घटना लिलिया तालुका के कानकोट गांव के पास शेत्रुंजी नदी किनारे की है. जांच में सामने आया है कि शेर संभवतः खेलते समय या पानी की तलाश में कुएं के पास पहुंचा और संतुलन बिगड़ने से अंदर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई.
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में शिकार का पीछा करने या किसी तरह के संघर्ष के संकेत नहीं मिले हैं. लिलिया फॉरेस्ट रेंज के आरएफओ भरत गलानी के अनुसार, यह एक दुर्घटना का मामला लग रहा है, जिसमें शेर का बच्चा खेलते समय कुएं में गिर गया. हालांकि विभाग ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कुएं के आसपास सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे.

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पिछले कुछ महीनों में अमरेली और आसपास के इलाकों में शेरों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं. जनवरी महीने में भावनगर-सोमनाथ नेशनल हाइवे पर वाहन की टक्कर से एक शेर की मौत हुई थी. वहीं करीब डेढ़ महीने के भीतर सड़क हादसों में तीन शेरों की जान जाने के मामले दर्ज हुए. अब कुएं में गिरने से मौत की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

लाइन नेचर फाउंडेशन अमरेली के अध्यक्ष नाथलाल सुखदिया ने इसे वन विभाग की लापरवाही बताया है. उनका कहना है कि शेर देश की अमूल्य धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग को कई बार खुले और खतरनाक कुओं को ढंकने या उन पर जाल लगाने की मांग की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
लोगों का कहना है कि शेत्रुंजी नदी के किनारे अमरेली से लेकर बृहद गिर क्षेत्र, लिलिया से पालीताना तक शेरों की आवाजाही रहती है. पानी और शिकार की तलाश में शेर अक्सर इन इलाकों में आते-जाते हैं. ऐसे में खुले कुएं, बिना सुरक्षा दीवार या जाल के बने जलस्रोत उनके लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. इससे पहले भी इसी क्षेत्र में करंट लगने से एक शेर की मौत का मामला सामने आ चुका है.