अहमदाबाद में आईपीएल मैच के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी करने वाले एक हाईटेक गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह मैच देखने नहीं बल्कि दर्शकों को निशाना बनाकर मोबाइल चोरी करने के इरादे से फ्लाइट से अहमदाबाद पहुंचा था. पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 21 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.
अहमदाबाद के जोन-3 की डीसीपी रूपल सोलंकी की टीम ने इस पूरे गिरोह का खुलासा किया. पुलिस के अनुसार यह गिरोह अलग-अलग राज्यों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी करता था. खासकर आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों के दौरान ये लोग सक्रिय हो जाते थे, जहां बड़ी संख्या में लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं.
पुलिस ने 4 अप्रैल को हुए आईपीएल मैच के बाद कालूपुर रेलवे स्टेशन से रघु महतो और विक्रम महतो को गिरफ्तार किया. तलाशी के दौरान उनके पास से 21 मोबाइल फोन बरामद किए गए. इसके साथ ही उनके पास से आधार कार्ड, एयरलाइन टिकट और अन्य कीमती सामान भी मिला.
पुलिस जांच में सामने आया कि रघु महतो इस गिरोह को संचालित करता था. वह पहले भी मोबाइल चोरी के मामले में पुलिस के रडार पर था. 16 फरवरी को पुलिस ने उसके भाई अमित मोहंती को गिरफ्तार किया था, लेकिन उस समय रघु फरार हो गया था. तब से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी और अब उसे चोरी के सामान के साथ पकड़ने में सफलता मिली है.
भीड़भाड़ वाले इलाकों में करते थे चोरी
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी झारखंड से फ्लाइट से अहमदाबाद आए थे. इसके अलावा ये लोग बेंगलुरु भी गए थे, जहां उन्होंने चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर से मैच के दौरान मोबाइल चोरी किए थे. अहमदाबाद में भी उन्होंने मैच से पहले दो मोबाइल चुराए थे. इस गैंग के साथ एक नाबालिग लड़का भी शामिल था, जो फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है. जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह एक बार में 20 से 25 मोबाइल चोरी करता था और फिर अपने गांव लौटकर उन्हें बेच देता था. कई बार ये लोग मुंबई जाकर भी चोरी के मोबाइल सस्ते दामों में बेचते थे.
चोरी के बाद ये लोग मोबाइल को सिल्वर फॉइल में लपेट देते थे. उनका मानना था कि इससे फोन का सिग्नल ब्लॉक हो जाएगा और उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा. इसके अलावा जो मोबाइल अनलॉक मिलते थे, उनमें से ये लोग पैसे भी ट्रांसफर कर लेते थे. जांच में सामने आया कि बरामद किए गए 21 मोबाइल अलग-अलग जगहों से चोरी किए गए थे. इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, आणंद, मेहसाणा और अडालज जैसे इलाके शामिल हैं. एक मोबाइल कालूपुर रेलवे स्टेशन से भी चोरी किया गया था.
सिल्वर फॉइल में लपेटकर छुपाते थे मोबाइल
पुलिस के अनुसार गिरोह भीड़भाड़ वाली जगहों को ही निशाना बनाता था. खासकर आईपीएल मैच के दौरान मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास का इलाका इनके लिए आसान टारगेट होता था, जहां एक साथ बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं. इसके अलावा गीता मंदिर बस स्टैंड जैसे स्थान भी इनके निशाने पर रहते थे. चोरी करने का तरीका भी काफी शातिराना था. गिरोह नाबालिग लड़कों का इस्तेमाल करता था. उन्हें सिखाया जाता था कि भीड़ में कैसे बिना किसी को शक हुए मोबाइल निकालना है. जैसे ही बस या मेट्रो में एक साथ 25 से 100 लोग चढ़ते या उतरते थे, उसी दौरान ये लोग अपने शिकार को निशाना बनाते थे.
चोरी की पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में होती थी. सबसे पहले एक व्यक्ति मोबाइल निकालता था, फिर उसे तुरंत दूसरे साथी को दे देता था. इसके बाद वह दूसरा व्यक्ति कुछ दूरी पर खड़े तीसरे व्यक्ति को फोन दे देता था. इस तरह अगर किसी एक को पकड़ा भी जाए, तो उसके पास मोबाइल नहीं मिलता था. मेहसाणा से चोरी किए गए दो मोबाइल अनलॉक थे, जिनका फायदा उठाकर आरोपियों ने तुरंत उनमें गूगल पे ऐप डाउनलोड कर लिया. चूंकि सिम कार्ड एक्टिव था, इसलिए उन्हें ओटीपी मिल गया और उन्होंने खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए. इस तरह ये लोग साइबर अपराध भी कर रहे थे.
अनलॉक फोन से करते थे पैसे ट्रांसफर
पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में 12 केस दर्ज किए जा चुके हैं और बाकी मोबाइल मालिकों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यह मामला दिखाता है कि किस तरह अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और फरार नाबालिग की तलाश जारी है.