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'बेटों को शूट कर देंगे...', बुजुर्ग महिला को किया 'डिजिटल अरेस्ट', फिर ठगों ने कराया 5.31 लाख ट्रांसफर

अहमदाबाद में डिजिटल अरेस्ट ठगी का नया मामला सामने आया है. 76 वर्षीय महिला को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर दिल्ली क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर धमकाया गया और बेटों को गोली मारने की धमकी देकर 5.31 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए. वहीं, बुजुर्ग महिला ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध में शिकायत दर्ज कराई है.

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बेटा आया तो खुला राज.(Photo: Representational)
बेटा आया तो खुला राज.(Photo: Representational)

अहमदाबाद में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप और बेटों को गोली मारने की धमकी देकर लाखों रुपये ठग लिए गए. ठगों ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का पुलिस अधिकारी बताकर महिला को निशाना बनाया और पूरे घटनाक्रम को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए अंजाम दिया.

जानकारी के अनुसार, शहर के वाडज क्षेत्र में रहने वाली बुजुर्ग महिला को 15 मार्च को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया. कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया और उसने अपना नाम मोहित गुप्ता बताते हुए खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया. इसके बाद महिला को बताया गया कि उनके आधार कार्ड से एक बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में किया जा रहा है.

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महिला को यह भी कहा गया कि मामला अदालत में चल रहा है और इससे बचने के लिए उन्हें अदालती फीस भरनी होगी. साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई कि वे किसी को घर न बुलाएं और न ही किसी के घर जाएं. शिकायत करने पर उन्हें तुरंत पुलिस स्टेशन ले जाने और उनके बेटों को गोली मारने की धमकी दी गई.

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डर और दबाव बनाकर वसूले पैसे

ठग ने महिला से उनके बैंक खातों, गहनों और संपत्ति की जानकारी भी हासिल कर ली. इसके बाद अदालत की फीस के नाम पर पैसे जमा करने को कहा गया. डर के कारण महिला बैंक पहुंचीं और ठग द्वारा बताए गए खाते में 5.31 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

इसके बाद भी ठग नहीं रुका और महिला पर गहने बेचकर पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगा. लगातार वीडियो कॉल के जरिए महिला पर मानसिक दबाव बनाया जाता रहा.

इस पूरे घटनाक्रम में ठग ने खुद को लगातार पुलिस अधिकारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश की और महिला को डराकर ठगी करता रहा.

फर्जी सरकारी पत्रों से बढ़ाया दबाव

महिला को डराने के लिए सूचना एवं संचार मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी पत्र भी भेजे गए. इन पत्रों के जरिए ठग ने मामला गंभीर दिखाने और पैसे वसूलने का दबाव बनाया.

लगातार कॉल और धमकियों के बीच मामला तब खुला जब महिला का बेटा घर पहुंचा और उसने फोन की जांच की. जांच के बाद पता चला कि यह पूरा मामला साइबर ठगी का है.

इसके बाद बुजुर्ग महिला ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध में शिकायत दर्ज कराई. यह घटना एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ती साइबर ठगी की घटनाओं को उजागर करती है.

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