दिल्ली के द्वारका में हुए स्कॉर्पियो हादसे ने फिर से एक गंभीर मुद्दा उठाया है. 23 वर्षीय साहिल की मौत 17 साल के नाबालिग की कार चलाने से हुई. यह सवाल किया जा रहा है कि नाबालिगों को कार चलाने क्यों दिया जाता है जिससे दूसरों की जान को खतरा हो सकता है. हादसे के बाद नाबालिग कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी उम्र का सहारा लेते हैं, वहीं अभिभावक भी कानून में कमी के कारण अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं.