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NCP के विलय से नेताओं का इनकार, लेकिन शरद पवार की चुप्पी बढ़ा रही सस्पेंस

NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलों के बीच शरद पवार गुट की बैठक में मर्जर पर सवाल उठे, लेकिन शरद पवार चुप रहे. वहीं, पार्टी नेताओं ने साफ किया कि अजित पवार की NCP के साथ कोई विलय नहीं होगा. दूसरी तरफ, अजित गुट की नाराजगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है.

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वाईबी चव्हाण सेंटर की मीटिंग में खामोश रहे एनसीपी चीफ शरद पवार. (File Photo: PTI)
वाईबी चव्हाण सेंटर की मीटिंग में खामोश रहे एनसीपी चीफ शरद पवार. (File Photo: PTI)

मुंबई की राजनीति में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है. क्या शरद पवार की पार्टी फिर से अजित पवार वाली NCP में मिल सकती है? इस बीच एक अहम बैठक के बाद तस्वीर थोड़ी साफ जरूर हुई, लेकिन पूरा सस्पेंस अभी भी खत्म नहीं हुआ है. वजह यह कि पार्टी के बड़े नेताओं ने साफ कह दिया कि कोई मर्जर नहीं होगा, लेकिन खुद शरद पवार ने इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी. उनकी इस चुप्पी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं और लोग यह जानने को बेताब हैं कि आखिर अंदर खाने चल क्या रहा है.

यह हाई-प्रोफाइल मीटिंग 10 जून को होने वाले पार्टी के स्थापना दिवस से ठीक पहले बुलाई गई थी. मीटिंग का मुख्य मकसद राज्य के मौजूदा सियासी हालात का जायजा लेना और आगे की रणनीति तय करना था. दरअसल, दूसरी तरफ यानी अजित पवार के खेमे में इस समय भारी कलह मची हुई है, जिससे शरद पवार और उनकी कोर टीम के लिए एक बड़ा सियासी मौका बनता दिख रहा है.

हालांकि, पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने विलय की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया. नेताओं ने साफ कहा कि अजित पवार वाली NCP में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है. लेकिन पार्टी के कुछ विधायकों को इस बात से निराशा भी हुई, क्योंकि उनका मानना था कि कार्यकर्ताओं में भ्रम बना हुआ है और इस पर खुद शरद पवार को खुलकर बोलना चाहिए.

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शरद पवार की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

दरअसल, मर्जर की चर्चा तब तेज हुई थी जब हाल ही में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और शरद पवार की मुलाकात हुई थी. उसी समय अजित पवार गुट में भी अंदरूनी नाराजगी की खबरें सामने आने लगी थीं. हालात तब और दिलचस्प हो गए, जब उपमुख्यमंत्री और NCP प्रमुख सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को भेजी गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को जगह नहीं दी.

इसी घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी कि शायद दोनों गुट फिर साथ आ सकते हैं. लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने साफ कर दिया कि मर्जर की सभी अटकलों पर विराम लग चुका है.

उधर, राजनीतिक हलकों में एक और चर्चा जोरों पर है. सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार गुट के करीब 22 नाराज विधायक हाल के दिनों में शरद पवार से मुलाकात कर चुके हैं. माना जा रहा है कि अगर वहां नाराजगी कम नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में कुछ नेता पाला बदल सकते हैं. ऐसे में शरद पवार की चुप्पी फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सस्पेंस बनी हुई है.
 

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