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माउथ-फुट वायरल इंफेक्शन से बच्चों को बचाएं

राजधानी में डेंगू वायरस तो अपना कहर बरसा रहा है लेकिन अब फुट-माउथ इंफेक्शन के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं. चिंता की बात ये हैं कि ये छोटे-छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहा है.

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प्रतीकात्‍मक फोटो: सोच-समझकर कराएं टेस्‍ट
प्रतीकात्‍मक फोटो: सोच-समझकर कराएं टेस्‍ट

राजधानी में डेंगू वायरस तो अपना कहर बरसा रहा है लेकिन अब फुट-माउथ इंफेक्शन के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं. चिंता की बात ये हैं कि ये छोटे-छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहा है.

अस्पतालों में आजकल डेंगू के मरीजों के साथ जो और मरीज बढ़ रहे हैं वो हैं छोटे-छोटे बच्चे. ये मासूम बच्चे हो रहे हैं शिकार फुट माउथ इंफेक्शन का. विशेषज्ञों के मुताबिक ये एक वायरल इंफेक्शन हैं. साल में इसके कभी-कभार मामले देखने को मिलते हैं लेकिन इस मौसम में वायरस तेजी से पनपते हैं और यही कारण है कि इस बीमारी के वायरस काफी एक्टिव हो गए हैं.

रॉकलैंड अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना बताती हैं कि उनके पास रोजाना इस वायरल के शिकार 3-4 बच्चे आ रहे हैं. डॉ. वंदना के अनुसार पैरेंट्स बच्चों में बुखार, कुछ ना खा पाने की शिकायत लेकर पहुंचते हैं और जब उनको चेक किया जाता है तो हाथ-पांव मुंह के बाहर-अंदर तक लाल रैशेश नजर आते हैं.

मूलचंद अस्पातल में भी हैरान-परेशान पैरेंट्स अपने बच्चों के शरीर पर लाल रैशेश की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. यहीं के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव मलिक के अनुसार इन बच्चों की उम्र 2 से 8 साल के बीच है. डॉक्टरों के मुताबिक इस वायरल के लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि यदि ये बिगड़ जाए तो मुंह के छाले गले तक पहुंच जाते हैं और बच्चा पानी तक नहीं पी पाता, उसको एडमिट करना पड़ जाता है.

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इस वायरल के मुख्य लक्षण हैं हल्का बुखार, गला खराब हो जाना, जुकाम-छीकें आनी शुरू हो जाती है. हाथों की हथेलियों, पांवों के तलवे पर लाल रैशेश दिखने लगते हैं. मुंह के अंदर-बाहर लाल रैशेश और छाले पड़े जाते हैं. लेकिन अच्छी बात ये है कि इस वायरल से फिलहाल कोई खतरा नहीं है. डॉक्टरों के मुताबिक इसको फैलने वाला वायरस काफी माइल्ड है. लेकिन जो बच्चे इसका शिकार हो चुके हैं उनके साथ पूरी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ये वायरस काफी संक्रमित है और एक बच्चे से दूसरे में तेजी से फैल रहा है.

डॉ वंदना के अनुसार इसके शिकार बच्चों को स्कूल बिल्कुल नहीं भेजना चाहिए साथ ही घर में भी उन्हें अलग रखना चाहिए. खाने में तरल पदार्थ के अलावा, पतला दलिया, खिचड़ी दें. मुंह में छाले होने के कारण बच्चा ठीक से खा नहीं पाता इसलिए पतला खाना दें. ये इंफेक्शन अपने आप 7-8 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस दौरान बच्चों के खान-पान हाइजीन पर पूरा ध्यान दें और डाक्टर की सलाह जरूर लें. हम तो यही सलाह देंगे कि मौसम तमाम तरह के वायरल इंफेक्शन का है और इनसे बचने के लिए जरूरी है उन सावधानियों पर अमल करें जो इनसे बचने के लिए बार-बार दोहराई जा रही हैं.

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