दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में बुधवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब हॉस्टल की सैकड़ों छात्राओं ने मेस में परोसे जा रहे भोजन की 'घटती गुणवत्ता' के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. छात्राओं का आरोप है कि उन्हें दिया जाने वाला खाना न केवल बेस्वाद है, बल्कि स्वास्थ्य के मानकों पर भी खरा नहीं उतर रहा है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में छात्राएं अपनी मांगों को लेकर हॉस्टल परिसर में इकट्ठा दिखाई दे रही हैं. विरोध दर्ज कराने के अनोखे तरीके के रूप में छात्राओं ने अपने हाथों में मेस की थालियां और चम्मच लेकर उन्हें जोर-जोर से बजाकर प्रदर्शन किया.
स्टूडेंट्स का कहना है कि प्रशासन उनकी शिकायतों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रहा है, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा. हालांकि प्रशासन ने इस आरोप से इनकार किया है.
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ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने एक बयान में छात्राओं के साथ एकजुटता जताते हुए दावा किया कि उन्हें सूखी रोटी और “घटिया भोजन” पर गुजारा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. छात्राओं का आरोप है कि एलपीजी संकट शुरू होने के बाद से खाने की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है.
कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह विरोध गैस संकट से संबंधित नहीं है और हॉस्टल की रसोई में PNG कनेक्शन है. कॉलेज के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, 'वास्तव में विरोध उस शिकायत के कारण शुरू हुआ कि परोसे गए भोजन में मिर्च अधिक थी. हॉस्टल में खाना और भोजन हर रोज स्टूडेंट्स की पसंद के अनुसार ही तैयार किया जाता है.'
प्रशासन ने इसे एक मामूली असंतोष बताया है, जबकि स्टूडेंट्स इसे एक बड़े बुनियादी संकट के रूप में देख रहे हैं. AISA ने कहा, 'पौष्टिक भोजन पाना छात्राओं का बुनियादी अधिकार है, कोई विलासिता नहीं है. प्रशासन को तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए.'