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सीलिंग पर AAP सांसद प्राइवेट बिल संसद में रखें: कपिल मिश्रा

कपिल ने कहा कि दिल्ली सरकार को सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाना होगा. दिल्ली सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिकाकर्ता क्यों नहीं बनती है. अभी तक केवल मार्केट एसोसिएशन और आरडब्ल्यूए ही कोर्ट में खड़ी है.

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कपिल मिश्रा (फाइल फोटो)
कपिल मिश्रा (फाइल फोटो)

दिल्ली में चल रही सीलिंग के मुद्दे पर दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा है. कपिल मिश्रा ने लिखा है कि दिल्ली सरकार के लिए सीधी बात है अपनी जिम्मेदारी पहले निभाओ.

कपिल मिश्रा ने कहा कि 15 दिसंबर से दिल्ली में सीलिंग चल रही है. ऐसे में अब 83 दिन बाद दिल्ली के सीएम पत्र लिख रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी मुझे मिलने का टाइम दीजिए. राहुल गांधी जी मुझे मिलने का टाइम दीजिए, यह काम करने का तरीका नहीं है.

कपिल ने कहा कि दिल्ली सरकार को सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाना होगा. दिल्ली सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिकाकर्ता क्यों नहीं बनती है. अभी तक केवल मार्केट एसोसिएशन और आरडब्ल्यूए ही कोर्ट में खड़ी है. दिल्ली विधानसभा खुद कानून पास करके केंद्र की कैबिनेट को क्यों नहीं भेजती है, कपिल ने कहा आप भी तो कुछ काम कीजिए.

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ने कहा कि अगर केंद्र सरकार से ही कानून पास कराना है तो लोकसभा में आम आदमी पार्टी के 4 सांसद हैं. राज्यसभा में दिल्ली से 3 सांसद हैं. ऐसे में अगर प्राइवेट बिल संजय सिंह राज्यसभा में पेश करते हैं तो उस पर चर्चा करनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से एफिडेविट मांगा है और के वकील से अपना पक्ष रखने को कहा है. अभी तक दिल्ली सरकार के वकील ने अपना पक्ष ही नहीं रखा है. इसमें डीडीए पार्टी है, एमसीडी पार्टी है और दिल्ली सरकार पार्टी है. कपिल ने कहा कि दिल्ली सरकार का वकील कम से कम अपना पक्ष तो रखे.

कपिल ने कहा कि दिल्ली सरकार को कोर्ट में जाकर याचिकाकर्ता बनना होगा. यदि चिदंबरम और राम जेठमलानी जैसे वकील सरकारी पैसे पर केजरीवाल के लिए आ सकते हैं तो दिल्ली के व्यापारियों के लिए साधारण वकील क्यों भेज रहे हो. दिल्ली के व्यापारियों के दुख को दूर करने के लिए एक अच्छा वकील क्यों नहीं किया जा सकता. केजरीवाल ने 31 मार्च की इतनी दूर की डेट क्यों दी है मुझे यही समझ नहीं आता है यदि उन्हें व्यापारियों के दर्द को प्रदर्शन के जरिए दूर करना है तो यह भूख हड़ताल कल से ही क्यों नहीं की जा रही.

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