केंद्र सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी. सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस पर आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही फिलहाल नहीं होगी, लेकिन राजनीतिक टकराव जारी है. बीजेपी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने उनके भाषण के कथित आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने के लिए नोटिस दिया है.
हालांकि, कुछ अंश पहले ही रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं. बीजेपी का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है. दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर लगाए गए आरोपों का जवाब वे खुद सदन में देंगे.
कांग्रेस MP रंजीत रंजन ने गुरुवार को चल रहे बजट सेशन के बीच BJP की सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि वह विपक्ष की उठाई गई ज़रूरी चिंताओं का जवाब देने के बजाय आलोचना को टाल रही है. उन्होंने कहा, "जब आप उनकी गलतियां बताते हैं, तो बीजेपी जवाब देती है. आप 11 साल से सरकार में हैं, और राहुल गांधी, विपक्ष के नेता के तौर पर, पूछ रहे हैं कि क्या देश की सुरक्षा, हमारे किसान, एनर्जी और डेटा सुरक्षित हैं. जिस तरह से आपकी डील है, वह सुरक्षित नहीं लगती. जिस तरह से फाइनेंस मिनिस्टर गुस्से में बोल रहे थे, देश गुस्से से नहीं चलता; यह बहस और चर्चा से चलता है."
राहुल गांधी पर सरकार का यू-टर्न
राहुल गांधी ने एक दिन पहले लोकसभा में बजट पर बोलते हुए एपस्टीन फाइल्स का जिक्र किया था. राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम लेकर भी आरोप लगाए थे. सरकार ने इसे लेकर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था. सरकार ने अब अपना फैसला बदल लिया है.
केंद्र सरकार अब राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी. सरकार ने खुद प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था और अब फैसला बदल लिया. इसके पीछे गतिरोध के बाद मशक्कत से पटरी पर लौटी लोकसभा में नया गतिरोध शुरू करने से बचने की कवायद भी वजह बताई जा रही है.
बीजेपी सांसद ने की ये मांग...
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राहुल गांधी के कथित 'अनैतिक आचरण' की जांच के लिए संसदीय जांच समिति गठित करने की मांग की है. पत्र में राहुल गांधी पर संसद के अंदर और बाहर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया गया है, जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए हानिकारक बताए गए हैं.
दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 11 फरवरी को लोकसभा में दिए भाषण में पूर्व थलसेन अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का जिक्र कर भारतीय सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों की छवि को नुकसान पहुंचाया.
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राहुल गांधी पर कई मंत्रालयों और भारतीय कॉरपोरेट जगत को लेकर 'अप्रमाणित आरोप' लगाकर बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने का भी आरोप लगाया गया है. पत्र में राहुल गांधी के विदेशी संगठनों, विशेष रूप से जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन से जुड़े होने तथा उनकी विदेश यात्राओं की फंडिंग की जांच की मांग की गई है.
निशिकांत दुबे ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाते हुए राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने तक की कार्रवाई की मांग की है.