दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में आत्महत्या करने वाले अलवर निवासी जज अमन शर्मा का शव उनके पैतृक घर पहुंचने के बाद रविवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया. सुबह करीब आठ बजे तीजकी श्मशान घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. उनके पिता एडवोकेट प्रेम कुमार शर्मा ने मुखाग्नि दी. इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और न्यायिक सेवा से जुड़े कई लोग मौजूद रहे.
अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा. परिजनों ने नम आंखों से अमन को विदाई दी और उनके लिए न्याय की मांग उठाई. परिवार का आरोप है कि अमन की वैवाहिक जिंदगी काफी समय से तनावपूर्ण चल रही थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अमन की पत्नी उनके पिता को घर में आने से रोकती थी और उनका अपमान भी करती थी. इतना ही नहीं, परिजनों का कहना है कि उन्हें कई बार झूठे मामलों में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी भी दी गई थी.
परिवार ने साली की भूमिका पर उठाया सवाल
परिवार ने इस पूरे विवाद में अमन की साली की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि साली लगातार अमन की पत्नी को भड़काती थी, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद और गहराता गया. परिजनों के मुताबिक साली स्वयं भी अपने पति से अलग रह रही है और उसका पति दिल्ली पुलिस में वरिष्ठ पद पर तैनात है. बताया जा रहा है कि अमन शर्मा की न्यायिक सेवा में नियुक्ति वर्ष 2021 में हुई थी और वे अपने करियर में आगे बढ़ रहे थे.
हालांकि, निजी जीवन में चल रहे तनाव ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया. घटना के समय उनकी पत्नी की बहन भी घर में मौजूद थी. घटना के बाद अमन की पत्नी अपने दोनों बच्चों को लेकर घर से चली गई. अंतिम संस्कार में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान कैडर के कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की. वहीं, ससुराल पक्ष से कोई भी व्यक्ति इस दौरान मौजूद नहीं रहा, जिससे मामले को लेकर और सवाल खड़े हो रहे हैं.