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दिल्ली को अधिक ऑक्सीजन देने के लिए HC ने केंद्र पर बनाया नया दबाव

कोर्ट ने कहा कि कई दूसरे हॉस्पिटल ने रोगियों को भर्ती करने की संख्या घटा दी है जो ठीक नहीं है. दिल्ली में 700 मीट्रिक टन गैस मिल जाए तो इन सबकी समस्या का हल निकल जाएगा.

ऑक्सीजन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई (फाइल फोटो) ऑक्सीजन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई
  • हाई कोर्ट ने 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने की कही बात

दिल्ली में ऑक्सीजन, बेड और मेडिसीन की उपलब्धता को लेकर सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट मे सुनवाई शुरू हुई. द्वारका स्थित रॉकलैंड अस्पताल के वकील ने कोर्ट को बताया कि हॉस्पिटल पूरी तरह से खाली हो गया है.

हॉस्पिटल का मालिक किसी भी अथॉरिटी को चाबी सौंपने के लिए तैयार है. हॉस्पिटल के पास 77 बेड हैं लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर एक भी नहीं है. HC ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह अस्पताल का इंस्पेक्शन करके उसको कब्जे में ले. 

वहीं दिल्ली सरकार के वकील ने सेना के उपयोग के सवाल पर कोर्ट को बताया कि उपमुख्यमंत्री ने रक्षामंत्री को पत्र लिखा है. इसमें एक या दो दिन का समय लगेगा. दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखी है और मदद मांगी है.

उन्होंने रक्षा मंत्रालय से दिल्ली में 10000 ऑक्सीजन युक्त बेड और एक हजार आईसीयू बेड बनाने में मदद मांगी है. इसके साथ ही दुर्गापुर, कलिंगा नगर आदि प्लांटों से टैंकर के जरिए दिल्ली ऑक्सीजन लाने में मदद मांगी है. 

एमिकस क्यूरी ने दिल्ली हाई कोर्ट को ऑक्सीजन का बफर स्टॉक बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में बताया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इसमें सेना की मदद ली जा सकती है. हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कहा कि राज्य सरकार ने मदद के लिए सेना की सहायता लेने के संबंध में केंद्र को लिखा है. आपको इसपर केंद्र की तरफ से रिस्पांस देना होगा. 

केंद्र की तरफ से ASG चेतन शर्मा ने भरोसा दिलाया कि वो केंद्र से निर्देश लेंगे. कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को दिल्ली के डिप्टी सीएम द्वारा लिखे गए पत्र के मुद्दे को रिकॉर्ड पर लिया. जिसमें ऑक्सीजन बेड और आईसीयू बेड के साथ अस्पताल स्थापित करने के लिए सेना की मदद उपलब्ध कराने  का अनुरोध किया गया है. 
 
इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट  ने अपने आदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति के संबंध मे कहा है. बेड और अस्पतालों की कमी के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है. हाईकोर्ट ने केंद्र की तरफ से पेश हुए ASG से कहा कि आप हमें यह नहीं बता सकते कि हम ऑक्सीजन आपूर्ति पर सुनवाई  के हकदार नहीं हैं.
 
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को निर्देश दिया कि वो डिप्टी सीएम द्वारा लिखे गए पते पर केंद्र के जवाब की जानकारी दें. वकील वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली सरकार को मेडिकल हेल्पलाइन के लिए रिटायर डॉक्टर को शामिल करने के लिए प्रचार करना चहिए. वकील वेणुगोपाल ने कहा कि हमको बताया गया कि UK और US के डॉक्टर भारत के लोगों को टेली कम्युनिकेशन के ज़रिए सलाह दे रहे हैं

केंद्र सरकार ने कहा कि कोरोना महामारी में पूरी डॉक्टर बिरादरी की भागीदारी हो सकती है. वकील वेणुगोपाल ने कहा कि ICMR ने हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षण के मरीज़ों के उपचार के लिए गाइडलाइंस जारी किया है. एमिकस क्यूरी ने कहा की ICMR की गाइडलाइंस को केंद्र सरकार को प्रचारित करना चाहिए.

कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि कितने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सीमा शुल्क विभाग के पास पेंडिंग हैं. वकील अमित महाजन ने कहा कि कोई निश्चित संख्या नहीं है. एक आदेश में कहा गया है कि इस प्रक्रिया को 3 घंटे के भीतर पूरा किया जाना है. कोर्ट ने कहा कि हम आपके जवाब से संतुष्ट नहीं है आप इस पर स्पष्ट जवाब दीजिए.

वकील वेणुगोपाल ने कहा कि जो फंड होता है वह सामान्य COVID फंड होता है. मेरा कहना है कि केवल ऑक्सीजन के लिए एक अलग कोष स्थापित करें. वकील वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने एम्बुलेंस को मुक्त करने और मृतकों को ले जाने के लिए डीटीसी बसों का उपयोग करने तथा अतिरिक्त श्मशान घाट उपलब्ध कराने का वादा किया है.

वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली सरकार को कंसंट्रेटर, टैंकरों आदि के लिए फंड की स्थापना करनी चहिए. मैं व्यक्तिगत रूप से लोगों को चंदा देने की व्यवस्था करूंगा. दिल्ली सरकार के वकील ने कहा मुख्यमंत्री राहत कोष मौजूद है, हम खाता संख्या का विज्ञापन करेंगे. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हम ऑक्सीजन की कमी से लोगों को मरने नहीं दे सकते हैं. 

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि दिल्ली में कई नर्सिंग होम ऐसे है जहां पर ऑक्सीजन की कमी है. नर्सिंग होम में लगभग 8 हज़ार बेड हैं, बड़े अस्पतालों के साथ साथ नर्सिंग होम में भी ऑक्सीजन की सप्लाई होनी चहिए. एमिकस ने कोर्ट से कहा कि दिल्ली के लिए 50MT ऑक्सीजन का बफर स्टॉक बनाया जाए.

इसके जवाब में दिल्ली सरकार ने कहा कि ये 100 MT हो. आने वाले दिनों में 976 MT ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी. हम मंगलवार को हलफनामा दाखिल करेंगे कि पांच हजार बेड वाला अस्पताल शुरु नहीं हो पा रहा है. हाई कोर्ट ने कहा कि फिर हम भी आदेश जारी करेंगे. 

गोयल गैस ने बत्रा हॉस्पिटल के खिलाफ की शिकायत की

उन्होंने कहा कि यह नहीं हो सकता कि आप ताकत से वाहन को जब्त नहीं कर सकते. बत्रा हॉस्पिटल ने सफाई दी कहा कि 10 बजे तक मुझे 2.9 मीट्रिक टन गैस मिली. हमारा इरादा आपूर्ति बाधित करने का नहीं है. जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि मैंने कभी इस तरह की कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी. जिसके बाद बत्रा अस्पताल ने कहा कि यह कभी नहीं दोहराया जाएगा.

कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम चेतावनी देते हैं कि अगर भविष्य में इस तरह का आचरण किया गया तो कार्रवाई की जाएगी. हम चाहते हैं कि सभी अस्पताल नियमों का पालन करें. दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि हम अभी 33 टैंकरों पर नजर रख रहे हैं. लेकिन वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, जो भी कारण हो. कोर्ट ने कहा कि इन टैंकरों पर जीपीएस लगाया जाना चाहिए. कोर्ट ने माइक्रो मैनेजमेंट का भी सुझाव दिया.
 
ऑक्सीजन प्लांट में टैकरो को भरे जाने पर लग रहे समय को लेकर कोर्ट ने पूछा कि और अधिक रिफिलिंग पॉइंट्स के लिए क्या किया जा सकता है? जिससे टैकरों को जल्द भरा जा सके. कंपनियों का कहना था कि एक टैंकर को भरने में ढाई से तीन घंटे लगते हैं. 

हाई कोर्ट ने डिप्टी सीएम द्वारा सेना के अनुरोध के बारे में केंद्र से पूछा? ASG ने कहा कि एक अधिकारी रक्षा मंत्रालय के संपर्क में हैं. हम एमिकस और अदालत को पूरी जानकारी देंगे. हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर केंद्र से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के दिए गए निर्देशों को लेकर क्या कदम उठाए गए? केंद्र सरकार ने कहा कि हम अपनी क्षमता के अनुसार कर रहे हैं और उस आदेश को पूरा करने की कोशिश में लगे हैं. 
 
वहीं वेंकटेश्वर अस्पताल ने आरोप लगाया कि उसका गैस कोटे का आवंटन कम कर दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि आपूर्ति के हिसाब से आवंटन किया जाता है. कोर्ट ने कहा कि कई दूसरे हॉस्पिटल ने रोगियों को भर्ती करने की संख्या घटा दी है जो ठीक नहीं है. दिल्ली में 700 मीट्रिक टन गैस मिल जाए तो इन सबकी समस्या का हल निकल जाएगा.

एडवोकेट वशिष्ठ ने सेना को गैस की आपूर्ति दिए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक बहुत ही जटिल समस्या है. युद्ध स्तर पर सेना को यह करने की आवश्यकता है. कोर्ट ने कहा कि एक बार मंजूरी मिल जाए फिर हम देखेंगे. ASG चेतन शर्मा ने कहा कि उनके पास ये जानकारी है कि इस मामले को रक्षा मंत्री खुद देख रहे हैं.

 

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