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24-26 डिग्री पर रखें AC, दिन में लाइट रहें बंद... दिल्ली सरकार का 'बिजली बचाओ' आदेश

दिल्ली सरकार ने सभी विभागों को बिजली की बर्बादी रोकने और जरूरत के हिसाब से बिजली इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं. आदेश के तहत दिन में अनावश्यक लाइटें बंद रखने, प्राकृतिक रोशनी का उपयोग बढ़ाने और AC को 24-26 डिग्री सेल्सियस पर चलाने को कहा गया है. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत अपील के बाद लिया गया है.

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दिल्ली सरकार इससे पहले भी खर्च और ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठा चुकी है. (Image: PTI)
दिल्ली सरकार इससे पहले भी खर्च और ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठा चुकी है. (Image: PTI)

देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दिल्ली सरकार ने बिजली की बर्बादी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने साफ कहा है कि दफ्तरों में अनावश्यक लाइटिंग से बचा जाए, प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा उपयोग हो और एयर कंडीशनर ऊर्जा दक्ष तरीके से चलाए जाएं. 

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों को अपने अधीन आने वाले कार्यालयों में बिजली की खपत नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है.

आदेश में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन और ऊर्जा बचाने की अपील को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. इसके तहत दिन के समय बेवजह जलने वाली लाइटों को बंद रखने और जहां संभव हो वहां प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं.

24 से 26 डिग्री पर रखने होंगे AC

सरकार ने यह भी कहा है कि कमरों, गलियारों और ऑफिस परिसरों में जरूरत से ज्यादा रोशनी से बचा जाए. केवल कार्य की आवश्यकता के अनुसार ही लाइटें चालू रखी जाएं. साथ ही मास्टर स्विच लगाने की सलाह दी गई है, ताकि काम खत्म होने के बाद सभी बिजली उपकरणों को एक साथ बंद किया जा सके और अनावश्यक बिजली खपत रोकी जा सके.

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आदेश के अनुसार एयर कंडीशनर 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच चलाए जाएंगे. जरूरत से ज्यादा कूलिंग से बचने और कार्यालय समय खत्म होने के बाद कूलर, एसी, कंप्यूटर, प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीन जैसे उपकरण बंद करने को कहा गया है.

संसाधन बचाने के लिए पहले से लागू हैं कई उपाय

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार इससे पहले भी खर्च और ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठा चुकी है. मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम और सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग जैसे उपाय भी अपनाए गए हैं.

सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव के बीच ऊर्जा संरक्षण अब केवल विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है. ऐसे में सरकारी दफ्तरों में बिजली की बचत को लेकर यह अभियान आने वाले दिनों में और सख्ती से लागू किया जा सकता है.

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