दिल्ली सरकार ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और गरीब-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब 1.20 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों को राशन कार्ड का अधिकार मिलेगा. इससे पहले यह सीमा 1 लाख रुपये निर्धारित थी.
सरकार का कहना है कि इस फैसले से वर्षों से खाद्य सुरक्षा से वंचित रह गए हजारों जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि गरीबों का अधिकार है. सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि केवल व्यवस्था की खामियों या अस्पष्ट नियमों के कारण कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे. उन्होंने कहा कि नए नियमों के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद बनाया जाएगा.
लाखों आवेदन लंबित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सालों से स्पष्ट नियमों के अभाव में दिल्ली में 3 लाख 89 हजार 883 से अधिक राशन कार्ड आवेदन लंबित हैं, जबकि 11 लाख 65 हजार 965 से ज्यादा लोग आज भी खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं. सरकार ने हाल में खाद्य सुरक्षा से जुड़े डेटा का व्यापक सत्यापन कराया, जिसमें बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आईं. जांच में पाया गया कि लगभग 6 लाख 46 हजार 123 लाभार्थियों की आय संबंधी जानकारी नियमों से मेल नहीं खाती थी.
इसके अलावा 95 हजार 682 लोग लंबे समय से सिस्टम में दर्ज थे लेकिन लाभ नहीं ले रहे थे. करीब 23 हजार 394 नाम दोहराव में, 6185 मामले मृत व्यक्तियों के नाम पर और 56 हजार 372 लोगों ने स्वयं सिस्टम से बाहर होने का अनुरोध किया. इन सभी कारणों से कुल मिलाकर 8 लाख 27 हजार 756 से अधिक रिक्तियां सामने आईं, जिन्हें अब वास्तविक जरूरतमंद परिवारों से भरा जाएगा.
योजना से बाहर रहेंगे ये लोग
नए नियमों के तहत पात्रता तय करने के लिए राजस्व विभाग की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही स्व-प्रमाणन (सेल्फ वेरिफिकेशन) की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों के पास ए से ई श्रेणी की कॉलोनियों में संपत्ति, जो आयकर देते हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है (रोजगार के लिए उपयोग होने वाला एक कमर्शियल वाहन इससे बाहर रहेगा), जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है या जिनके घर में 2 किलोवाट से अधिक बिजली कनेक्शन है, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे.
'पहले आओ-पहले पाओ' खत्म
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब राशन कार्ड जारी करने में ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. इसके स्थान पर जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं, जो आवेदनों की जांच कर जरूरत के आधार पर प्राथमिकता तय करेंगी. इन समितियों की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) करेंगे. समिति में स्थानीय विधायक और संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे. साथ ही, 20 प्रतिशत की वेटिंग लिस्ट भी तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में खाली होने वाले स्थानों को समय पर भरा जा सके.
'कोई भूखा न रहे' सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह निर्णय केवल नियमों का दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली के सबसे कमजोर वर्गों के लिए सम्मान, पारदर्शिता और भरोसे की गारंटी है. उन्होंने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रभावी और न्यायसंगत क्रियान्वयन की दिशा में उठाया गया है.