डेटिंग ऐप Tinder पर मैच हुआ. चैट शुरू हुई. लड़की ने मिलने बुलाया. कहानी यहीं तक सुनने में किसी डेटिंग ऐप की लगती है. लेकिन दरवाजा खुलते ही अंदर 'पुलिस' खड़ी थी. और कुछ मिनट बाद युवक से कहा जा रहा था- 15 लाख दो, नहीं तो रेप केस में अंदर कर देंगे.
दिल्ली में क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो डेटिंग ऐप्स के जरिए लोगों को फंसाता था. लड़की की फेक प्रोफाइल बनाकर दोस्ती, फिर मुलाकात, फिर नकली पुलिस रेड और उसके बाद वसूली. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. दो आरोपी अभी फरार हैं.
गैंग के लोग Tinder और QuackQuack डेटिंग ऐप पर लड़कियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे. प्रोफाइल में तस्वीरें लड़की की, बातें मीठी और भरोसा जीतने वाली. कुछ दिन चैट होती, फिर सामने वाला शख्स मिलने के लिए तैयार हो जाता. इसके बाद उसे किसी फ्लैट या सुनसान जगह बुलाया जाता.
यह पूरा मामला एक पीड़ित की शिकायत के बाद सामने आया. पीड़ित की मुलाकात डेटिंग ऐप पर 'कीर्ति' नाम की लड़की से हुई. बातचीत बढ़ी और उसे जनकपुरी बुलाया गया. युवक पहुंचा, लड़की मिली, फ्लैट में ले जाया गया. लेकिन कुछ ही देर बाद दरवाजा खुला और अंदर कुछ लोग घुस आए. उनमें एक पुलिस की वर्दी में था. उसने खुद को पुलिसकर्मी बताया और युवक पर लड़की के साथ गलत हरकत करने का आरोप लगाने लगा.
यहीं से असली खेल शुरू हुआ. युवक को कहा गया कि मामला रेप केस का बनेगा. अभी थाने चलो या 15 लाख रुपये दो. डर के मारे युवक कुछ समझ नहीं पाया. उसके पास इतनी रकम नहीं थी, तो आरोपियों ने उसे कार में बैठा लिया. बंधक बनाकर एटीएम ले जाकर पैसे निकलवाए. बाकी पैसों की व्यवस्था करने के लिए दबाव बनाया.
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लेकिन वहां से निकलने के बाद किसी तरह पीड़ित ने पुलिस को सूचना दे दी. जांच शुरू हुई और फिर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तफ्तीश शुरू की. 12 मई को इंस्पेक्टर पवन कुमार की टीम ने एक गैंग को दबोच लिया. चौंकाने वाली बात यह थी कि मुख्य आरोपी सुशील कुमार उस वक्त नकली पुलिस यूनिफॉर्म पहने मिला. यानी पूरा सीन ऐसा बनाया जाता था कि सामने वाला सच में पुलिस रेड समझे और डरकर पैसे दे दे.
गिरफ्तार आरोपियों में सुशील कुमार, दीपक उर्फ साजन, विनोद और नीरज त्यागी शामिल हैं. दो सदस्य- गगन और पूजा उर्फ कीर्ति अब भी फरार हैं. पुलिस का कहना है कि पूजा ही फर्जी तरीके से प्रोफाइल बनाकर डेटिंग ऐप पर चैट करती थी, जबकि दीपक प्रोफाइल ऑपरेट करता था. पूछताछ में कई बातें सामने आई हैं.
सुशील कुमार 2017 में भी इसी तरह के मामले में पकड़ा जा चुका है. उसका रोल फर्जी पुलिस बनकर रेड करना था. इसके बदले वह उगाही की रकम में 15 फीसदी हिस्सा लेता था. नीरज, विनोद और दीपक पर भी पहले से ऐसे ही एक केस दर्ज हैं.