दिल्ली एम्स ने सांसदों के इलाज के लिए वीआईपी व्यवस्था कर दी है. एम्स के नए डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास की एक चिट्ठी सामने आई है, जिसमें लोकसभा सचिवालय को बताया गया है कि सांसदों को सही तरीके से इलाज मिले, इसके लिए एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटंग प्रोसीजर तैयार कर लिया गया है.
इस पत्र में कई बिंदुओं में बताया गया है कि सांसद को ओपीडी, इमरजेंसी में दिखाने और भर्ती होने तीनों ही कंडीशन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं रहेंगी. एम्स प्रशासन ने इसके लिए एक कंट्रोल रूम और 24 घंटे के लिए एक ड्यूटी ऑफिसर की व्यवस्था कर दी है. ड्यूटी ऑफिसर एक डॉक्टर ही होगा, जिसकी जिम्मेदारी होगी कि वो सांसद को बिना देरी किए सही इलाज दिलाए. इसके लिए तीन लैंड लाइन और एक मोबाइल नंबर भी जारी कर दिया गया है.
लोकसभा सचिवालय पहले ही दे सकता है जानकारी
इस चिट्ठी में बताया गया है कि लोकसभा सचिवालय या सांसद का पर्सनल स्टाफ इन नंबरों पर संपर्क करके बीमारी के बारे में जानकारी दे सकता है. इसके अलावा सांसद किस डॉक्टर को दिखाएंगे ये भी बता सकते हैं. फोन के तुरंत बाद ड्यूटी ऑफिसर बीमारी से संबंधित विभाग के डॉक्टर से संपर्क करेगा और अगर कोई गंभीर बीमारी हुई तो सीधे विभाग के अध्यक्ष से भी संपर्क किया जा सकता है. जिस दिन अपॉइंटमेंट होगा, उस दिन सांसद एमएस ऑफिस में बने कंट्रोल रूम में पहुंचेंगे और एम्स प्रशासन उन्हें डॉक्टर तक पहुंचाएगा.
सांसद की सिफारिश आए मरीजों की भी होगी मदद
इसके अलावा अगर संसद सदस्य को इमरजेंसी हालात में लाया जाता है तो पेशेंट केयर मैनेजर उन्हें रिसीव करेगा और उन्हें बिना देरी किए इलाज दिलाना सुनिश्चित करेगा. इस चिट्ठी के सबसे आखिर बिंदु में बताया गया है कि सांसदों की सिफारिश से आए मरीजों को मदद करने के लिए मीडिया और प्रोटोकॉल विभाग काम करेगा.