आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग ने दिल्ली नगर से फैक्ट्री लाइसेंस खत्म करने की मांग की है. 'आप' ट्रेड विंग के मुताबिक, दिल्ली के इंडस्ट्रियल एरिया में एमसीडी फैक्ट्री लाइसेंस को लेकर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं. इस सिलसिले में ट्रेड विंग जल्द ही तीनों एमसीडी के कमिश्नरों से मिल कर फैक्ट्री मालिकों की शिकायत साझा करेगी.
'आप' ट्रेड विंग के कन्वीनर बृजेश गोयल ने बयान जारी कर बताया कि अधिकतर फैक्ट्री मालिकों की शिकायत है कि सभी इंडस्ट्रियल एरिया में एमसीडी की तरफ से किसी तरह का कोई काम नहीं कराया जाता है. गोयल ने आरोप लगाते हुए कहा कि फैक्ट्री लाइसेंस की सारी जिम्मेदारी डीएसआईआईडीसी की है, लेकिन इसके बावजूद व्यापारियों को एमसीडी के जाल में फंसाया जा रहा है. इसकी वजह से फैक्ट्री मालिकों को इंस्पेक्टर राज तो झेलना ही पड़ रहा है, बल्कि लाइसेंस रिनुअल के लिए रिश्वत भी देनी पड़ रही है.
आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग ने ऐलान किया है कि MCD के फैक्ट्री लाइसेंस को लेकर शिकायतें मिलने के बाद व्यापारी अब एमसीडी में काबिज बीजेपी को उसका चुनावी वादा याद दिलवाएंगे. जहां बीजेपी ने एमसीडी लाइसेंस को खत्म करने की बात कही थी. बृजेश गोयल ने बताया कि दिल्ली में 28 रजिस्टर्ड इंड्स्ट्रियल एरिया हैं. इन सभी की देखरेख का काम डीएसआईआईडीसी के हवाले है. वहां के सीवर, सड़क का रखरखाव आदि सब डीएसआईआईडीसी करती है. पानी कनेक्शन के लिए जल बोर्ड और बिजली कनेक्शन के लिए बिजली कंपनियां हैं. एमसीडी की भूमिका दूर-दूर तक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद फैक्ट्री मालिकों को अब भी एमसीडी लाइसेंस रिन्यू कराना पड़ता है.
'आप' ट्रेड विंग के मुताबिक दिल्ली नगर निगम का उद्योग संबंधी नियमन 1957 का है. उस समय दिल्ली में कोई भी विधिवत स्थापति इंडस्ट्रियल एरिया नहीं था. बिजली पानी की आपूर्ति का दायित्व एमसीडी के पास था. यही कारण था कि उस समय एमसीडी से लाइसेंस लेना पड़ता था. लेकिन 1957 के कानून को अब भी ढोया जा रहा है. उस समय उद्योग स्थापित करने से पूर्व क्षेत्र की स्थिति, बिजली पानी की मांग और आपूर्ति की स्थिति, उद्योग में कार्यरत मजदूरों की संख्या के आधार पर नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पहले एमसीडी की स्वीकृति आवश्यक थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.
आम आदमी पार्टी ने सवाल पूछा है कि अगर बिजली की सप्लाई प्राइवेट कंपनी के पास है, पानी दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत है. इंडस्ट्रियल एरिया में कौन सा उद्योग चलाया जा सकता है, यह दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी तय करती है. सभी इंडस्ट्रियल एरिया की जिम्मेदारी अब डीएसआईआईडीसी को सौंप दी गई है. तो इन सबके बावजूद भी एमसीडी किस क्षमता से इंडस्ट्रियल लाइसेंस जारी कर रही है?
गोयल ने दिल्ली के वैध औद्योगिक क्षेत्रों से नगर निगम फैक्ट्री लाइसेंस तुरंत प्रभाव से ख़त्म करने की मांग उठाई है. गोयल का कहना है कि भारत सरकार उद्योग/व्यवसाय के सहज संचालन के लिए इंस्पेक्टर राज खत्म करने की बात करती है. ऐसे में दिल्ली के नियमित औद्योगिक क्षेत्रों में एमसीडी फैक्ट्री लाइसेंस क्या भारत सरकार की पहल के विपरीत नही हैं?