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दिल्ली में कोरोना बेकाबू... 200 दिन बाद पॉजिटिविटी रेट 20% के करीब, नया वैरिएंट भी बढ़ा रहा चिंता

Coronavirus in Delhi: दिल्ली में कोरोना बेकाबू होने लगा है. संक्रमण दर 200 दिन बाद 20 फीसदी के करीब पहुंच गई है. मंगलवार को 917 नए मामले सामने आए और 3 मरीजों की मौत हुई. ओमिक्रॉन और उसके सब-वैरिएंट्स से संक्रमण बढ़ रहा है. अब नया सब-वैरिएंट BA.2.75 भी संक्रमण को बढ़ा रहा है.

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दिल्ली में आधे मरीजों में ओमिक्रॉन का नया सब-वैरिएंट BA.2.75 मिला है. (फाइल फोटो-PTI) दिल्ली में आधे मरीजों में ओमिक्रॉन का नया सब-वैरिएंट BA.2.75 मिला है. (फाइल फोटो-PTI)

Coronavirus in Delhi: राजधानी दिल्ली में कोरोना की रफ्तार अब डराने लगी है. यहां संक्रमण दर 20 फीसदी के करीब पहुंच गई है. दिल्ली सरकार के हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, मंगलवार को राजधानी में कोरोना के 917 नए मामले सामने आए हैं. तीन मरीजों की मौत भी हुई है. 

संक्रमण दर 19.20% पर पहुंच गई है. इसका मतलब ये हुआ कि हर 100 टेस्ट में 20 की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है. दिल्ली में 200 दिन बाद पॉजिटिविटी रेट इतना ज्यादा हुआ है. इससे पहले 21 जनवरी को पॉजिटिविटी रेट 21.48% था. उस दिन 12,306 मामले सामने आए थे और 43 मरीजों की मौत हुई थी.

आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में 15 दिन बाद एक हजार से कम संक्रमित मिले हैं. हालांकि, इसकी एक वजह कम टेस्ट होना भी हो सकता है. मंगलवार को सिर्फ 4,775 लोगों की जांच ही हुई थी. अधिकारियों का कहना है कि छुट्टी होने की वजह से लोग टेस्ट करवाने नहीं आए. 

दिल्ली में कैसे बेकाबू हो रहा कोरोना

- 15 अगस्तः कोरोना के 1,227 नए मामले सामने आए और 8 मरीजों की मौत हुई. पॉजिटिविटी रेट 14.57% रहा.

- 14 अगस्तः रविवार को 2,162 कोरोना संक्रमित मिले थे और 5 मरीजों की मौत हो गई थी. उस दिन पॉजिटिविटी रेट 12.64% था.

- 13 अगस्तः कोरोना से 9 मरीजों की मौत हुई और 2,031 मामले सामने आए. शनिवार को पॉजिटिविटी रेट 12.34% रहा था.

- 12 अगस्तः 10 मरीजों की मौत हुई. ये आंकड़ा 6 महीनों में सबसे ज्यादा था. उस दिन पॉजिटिविटी रेट 15.02% रहा था और 2,136 मामले सामने आए थे.

- 11 अगस्तः कोरोना के 2,726 नए मामले सामने आए थे. साढ़े 6 महीने बाद इतने ज्यादा मामले आए थे. 6 मरीजों की मौत हुई थी. जबकि, पॉजिटिविटी रेट 14.38% था.

लेकिन क्यों बढ़ रहा है कोरोना?

- सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देश के कई हिस्सों में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इसके लिए ओमिक्रॉन और उसके सब-वैरिएंट्स जिम्मेदार हैं. देश में ओमिक्रॉन के BA.2, BA.2.38, BA.4, BA.5 और BA.2.75 सब-वैरिएंट्स संक्रमण बढ़ा रहे हैं.

- अब तक BA.2, BA.2.38, BA.4 और BA.5 के मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब BA.2.75 के मामले भी सामने आने लगे हैं. दिल्ली के LNJP अस्पताल में हुई स्टडी में सामने आया है कि आधे मरीजों में BA.2.75 सब-वैरिएंट्स मिला है. 

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, LNJP अस्पताल में ये स्टडी 90 मरीजों में हुई थी और इनमें से आधे लोग नए सब-वैरिएंट BA.2.75 से संक्रमित मिले थे. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि ये सब-वैरिएंट्स कम गंभीर है और मरीज 5 से 7 दिन में रिकवर हो जा रहे हैं.

- BA.2.75 के साथ सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि इसमें 9 म्यूटेशन हैं और ये सभी नए म्यूटेशन हैं. इसलिए ये नैचुरल इन्फेक्शन के साथ-साथ वैक्सीन से बनी इम्युनिटी को भी मात दे सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि जब तक ऑक्सीजन की मांग और मौतों की संख्या न बढ़ने लगे, तब तक चिंता की बात नहीं है.

बूस्टर डोज बचा सकता है!

- दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को बताया कि जिन लोगों ने वैक्सीन की तीसरी डोज ली है, वो दो डोज लेने वालों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं. 

- उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले 90% मरीजों में वो लोग हैं, जिन्होंने दो डोज ली थी. सिर्फ 10% लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने बूस्टर डोज ली थी. इसलिए तीसरी डोज लेने वाले कोरोना से ज्यादा सुरक्षित हैं.

- सिसोदिया ने अपील करते हुए कहा कि जिन्होंने अभी तक वैक्सीन की दो डोज ही ली है, वो जल्द से जल्द तीसरी डोज ले लें. संक्रमण को रोकने के लिए तीसरी डोज जरूरी है. 

दिल्ली में क्या है कोरोना की स्थिति?

राजधानी में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 6,867 पहुंच गई है. इनमें से 5,387 मरीज होम आइसोलेशन में हैं. राजधानी में 326 कंटेनमेंट जोन हैं.

हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 9,416 बेड रिजर्व हैं. इनमें से 588 बेड पर मरीज भर्ती हैं. वहीं, कोविड केयर सेंटर और कोविड हेल्थ सेंटर में अभी सारे बेड खाली हैं. 

हालांकि, बढ़ते कोरोना मामलों के बावजूद अभी पाबंदियां नहीं लगाई जाएंगी. सिर्फ मास्क को जरूरी किया गया है. पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण हैं.

 

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