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कांग्रेस ने 2024 के चुनावों के लिए शुरू किया 'यूथ जोड़ो, बूथ जोड़ो' अभियान, फर्स्ट टाइम वोटरों पर होंगी निगाहें

2024 के आम चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. इसी दिशा में कांग्रेस ने अपना यूथ जोड़ो, बूथ जोड़ो अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान में हर बूथ पर एक 6 सदस्यों की टीम तैनात की जाएगी जो युवाओं से उनके मुद्दों पर चर्चा करेगी.

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कांग्रेस ने 2024 के चुनावों के लिए शुरू किया 'यूथ जोड़ो, बूथ जोड़ो' अभियान. (फाइल फोटो)
कांग्रेस ने 2024 के चुनावों के लिए शुरू किया 'यूथ जोड़ो, बूथ जोड़ो' अभियान. (फाइल फोटो)

2024 के आम चुनावों में कुछ महीने बचे हैं, बीजेपी और कांग्रेस दोनों चुनावी मोड में हैं. दोनों राजनीतिक दल विशेष रूप से युवा मतदाताओं पर ध्यान अपनी ओर करने की जुगत में लगे हैं और 2024 में पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को रिझाना शुरू कर दिया है.

'हिमाचल और कर्नाटक में मिला कैंपेन का फायदा'

इसी कड़ी में युवा कांग्रेस ने अपना प्रमुख आउटरीच कार्यक्रम 'यूथ जोड़ो बूथ जोड़ो' शुरू किया है. पहली बार यह अभियान 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद, IYC ने कर्नाटक चुनाव में अभियान चलाया. दोनों राज्यों में कांग्रेस को इस प्रोजेक्ट का खूब फायदा मिला है.

'एक बूथ पर तैनात होगी 6 लोगों की टीम'

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी वरुण पांडे ने बताया, 'हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के बाद हमने इस आउटरीच कार्यक्रम को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में शुरू किया है.' यूथ जोड़ो, बूथ जोड़ो अभियान में पार्टी ने एक बूथ पर छह लोगों की टीम तैनात की है. जिसमें से पांच कार्यकर्ता घर-घर जाते हैं और एक सोशल मीडिया संभालता है. प्रत्येक सत्यापित मतदाता को फिर वेब पोर्टल में दर्ज किया जाता है. अभियान का उद्देश्य युवा मतदाताओं को लक्षित करना है. साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले वोटरों पर खास ध्यान रखा गया है.

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हमरा उद्देश्य है युवाओं से संवाद: कांग्रेस नेता

वरुण ने कहा, 'हमारा मुख्य उद्देश्य युवाओं से उनके मुद्दे पर संवाद करना और उन्हें कांग्रेस पार्टी और इंडिया ब्लॉक की गारंटी के बारे में बताना है.' भारत में युवा मतदाता राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिनकी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 18-35 वर्ष की आयु का है. युवाओं की चिंता अक्सर शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक एजेंडे को प्रभावित करने वाले सामाजिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती हैं.

IYC के अनुसार, वे बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, अमीरी-गरीबी के अंतर, शिक्षा का निजीकरण और पूंजीकरण जैसे मुद्दों को युवाओं में के बीच उठाएंगे.

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