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कैश फॉर क्वेरी: महुआ मोइत्रा से जुड़े केस पर HC का लोकपाल को निर्देश- दो महीने में चार्जशीट पर करें फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने 'कैश फॉर क्वेरी' मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने के मामले में लोकपाल को दो महीने का अतिरिक्त समय दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये अंतिम विस्तार है और इसके बाद कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी. ये मामला लोकपाल के नवंबर 2025 के आदेश को रद्द करने के बाद सामने आया है, जिसमें सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी.

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कैश फॉर क्वेरी मामले में हाईकोर्ट ने लोकपाल को दी मोहलत. (File photo: ITG)
कैश फॉर क्वेरी मामले में हाईकोर्ट ने लोकपाल को दी मोहलत. (File photo: ITG)

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को TMC सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े 'कैश फॉर क्वेरी' मामले में सुनवाई की. कोर्ट ने लोकपाल से इस मामले में TMC सांसद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने से जुड़े मामले में लोकपाल को दो महीने का अतिरिक्त वक्त दे दिया है. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये अंतिम विस्तार है और इसके बाद समय विस्तार की किसी भी मांग पर विचार नहीं किया जाएगा.

इस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि वह लोकपाल द्वारा दो महीने का समय बढ़ाने के अनुरोध का विरोध नहीं कर रहे हैं.

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने आदेश दिया, 'निपटान की अवधि दो महीने के लिए बढ़ा दी गई है और ये भी कहा गया है कि समय बढ़ाने के लिए आगे कोई अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा.'

नवंबर का आदेश रद्द

इससे पहले 19 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने लोकपाल के नवंबर के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी. कोर्ट ने लोकपाल से कहा कि वह लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के प्रावधानों के तहत एक महीने के अंदर इस पर नए सिरे से विचार करें.

कोर्ट ने पाया था कि लोकपाल ने अधिनियम की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने में गलती की थी और कानून की व्याख्या गलत तरीके से की गई थी.

क्या है आरोप

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से दो बार की सांसद महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से नकदी और उपहार लेकर लोकसभा में सवाल पूछे थे.

सीबीआई ने 21 मार्च 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि मोइत्रा ने अपने संसदीय विशेषाधिकारों के साथ समझौता किया और अपने लोकसभा लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया.

वहीं, सीबीआई ने जुलाई 2025 में महुआ मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से जुड़े इस कथित घोटाले की अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंप दी थी. महुआ मोइत्रा ने लोकपाल द्वारा नवंबर 2025 में दी गई मंजूरी को चुनौती दी थी, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा.

अब लोकपाल को कानून के अनुसार, ये तय करना होगा कि क्या सीबीआई को चार्जशीट पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस फैसले के लिए अब मार्च 2026 तक की समय सीमा तय की गई है.

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