दिल्ली की सड़कों की हालत खराब है. बारिश के बाद दिल्ली में सड़कों को सुधारने और उन्हें फिर से बनाने का काम होना चाहिए, लेकिन दिल्ली वाले गढ्ढों में हिचकोले खाने के लिए मजबूर हैं. यहां तक कि दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली रिंग रोड भी बदहाली में पहुंच गई है, जिसे प्रीमियम रोड भी कहा जाता है. अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि दूसरी तमाम सड़कों की हालत क्या होगी.
रिंग रोड पर व्यस्त चौराहे, आश्रम के पास सड़क का बुरा हाल है. कई जगह गढ्ढों को ढंकने की कोशिश की गई है, लेकिन इस चक्कर में पूरी सड़क खराब हो गई है. इसी से थोड़े आगे लाजपत नगर का फ्लाइओवर खत्म होते ही गड्ढे शुरु हो जाते हैं. यहां एक हिस्सा तो ऐसा है कि जहां लग रहा है कि पूरी सड़क ही गायब हो गई हो. यहां सड़क बदहाल है और लोग परेशान. यही हाल डिफेंस कालोनी फ्लाय ओवर के पास का है, जहां गाड़ियां हिचकोले खाते हुए चलती हैं, क्योंकि हर कुछ दूरी पर सड़क टूटी हुई है या फिर ऊबड़ खाबड़ हो गई है. इसी तरह का हाल अमूमन पूरी दिल्ली में है. लोग बताते हैं कि हर साल मानसून के बाद सड़कों की मरम्मत का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार न सिर्फ रोड खराब हो रहे हैं, बल्कि इनकी मरम्मत का कभी कोई इंतज़ाम अभी तक नहीं किया.
अब इसके पीछे की वजह भी जान लीजिए, तो जनाब सरकार के खज़ाने से सडकों के लिए पैसा ही नहीं निकल रहा है. छह महीने बीत गए, लेकिन जितना बजट सड़कों के निर्माण और फ्लाइओवर बनाने के लिए रखा गया था, उसका पांचवां हिस्सा भी सरकार खर्च नहीं कर पाई. जाहिर है जब काम हो ही नहीं रहा, तो पैसा खर्च कहां होगा. बीजेपी के दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय तो कहते हैं कि गनीमत है कि ये सरकार 18 फीसदी तो खर्च कर पायी है क्योंकि इनकी जो प्रायोरिटी है उसे देखकर तो लगता है कि इनकी दिल्ली में कोई दिलचस्पी है ही नहीं. यहां तक कि दिल्ली की लाइफ लाइन है रिंग रोड उसकी हालत खराब है. सड़क गड्डों से भरी पड़ी है. उपाध्याय ने आरोप लगाया कि शहर के लिए कोई प्लानिंग नहीं है, क्योंकि ये लोग तो पंजाब, गोवा, गुजरात के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं.