देश की राजधानी दिल्ली में नगर निगम चुनाव की आहट के साथ ही 'कूड़ा पॉलिटिक्स' गरमा गई है. आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. दिल्ली में कूड़े के पहाड़ बनने के मामले को लेकर AAP नेताओं की ओर से बीजेपी पर निशाना साधने के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं. इसके चलते दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता गुरुवार को गाजीपुर में आमने-सामने आ गए और एक दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
बता दें कि 15 सालों से दिल्ली के नगर निगम में बीजेपी का कब्जा है जबकि दिल्ली की सत्ता पर आठ साल से आम आदमी पार्टी काबिज. इसके बावजूद आम आदमी पार्टी एमसीडी में सियासी वर्चस्व नहीं कायम कर पा रही है. अब एमसीडी चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी दिल्ली के कूड़े के पहाड़ को लेकर बीजेपी के खिलाफ एजेंडा सेट करना शुरू कर दिया, जिससे बीजेपी बुरी तरह से घिर गई है.
15 साल में बीजेपी ने खड़े किए 3 कूड़े के पहाड़
दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल एमसीडी चुनाव के मद्देनजर बीजेपी को कठघरे में खड़ा करने के लिए गुरुवार को मैदान में उतरे हैं. केजरीवाल गाजीपुर लैंडफिल साइट देखने पहुंचे हैं, जहां उन्होंने राजधानी निवासियों को भी गाजीपुर पहुंचने का न्योता दिया था. इस दौरान केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि 15 साल में बीजेपी ने दिल्ली को कूड़े के ढेर में तब्दील कर दिया है. गाजीपुर की तरह दिल्ली में तीन कूड़े के पहाड़ खड़े कर दिए हैं.
बीजेपी ने लगाए केजरीवाल डाउन-डाउन के नारे
सीएम अरविंद केजरीवाल के गाजीपुर साइट पर पहुंचने के दौरान रास्ते में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और केजरीवाल डाउन-डाउन के नारे लगाए. केजरीवाल ने कहा कि आसुरी शक्तियां हमेशा सच और ईमानदारी को दबाने की कोशिश करती हैं. दिल्लीवासियों ने देखा कि आप की सरकार को स्कूल-अस्पताल की जिम्मेदारी मिली, तो उन्हें अच्छा कर दिया. दिल्ली की जनता राजधानी में साफ-साफई के लिए एमसीडी से बीजेपी को हटाने और आम आदमी पार्टी को मौका देने का मन बना चुकी है.
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने एमसीडी में रहते हुए 15 सालों में सिर्फ तीन बड़े कूड़े के पहाड़ खड़े किए हैं और दिल्ली में 16 जगहों को कूड़े के ढेर बनाने के लिए चिन्हिंत किया. केजरीवाल ने गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वो मुझ पर दिल्ली एमसीडी को फंड न देने का आरोप लगाया. मैं गृहमंत्री से पूछना चाहता हूं कि आपने एमसीडी को कितना फंड दिया है? दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश कहकर अपनी जिम्मेदारी से वो दूर भागते हैं.
दिल्ली के नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. मोदी सरकार ने दिल्ली के तीनों नगर निगम को एकीकृत किया और सीटों का परिसीमन भी कर दिया है. ऐसे में दिल्ली एमसीडी चुनाव की औपचारिक ऐलान चुनाव आयोग कभी भी कर सकता है. आम आदमी पार्टी एमसीडी के चुनावी आहट के साथ ही सियासी एजेंडा सेट करने लगी है, जिसके तहत बीजेपी को घेरने के लिए 'कूड़ा पॉलिटिक्स' शुरू किया है, जिसके दिल्ली के लैंडफिल साइट पर लगे कूड़ों को ढेर को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है.
दिल्ली में पांच लैंडफिल साइट
बता दें कि दिल्ली में पांच लैंडफिल साइट है, जो ओखला, गाजीपुर, तेहखंड, भलस्वा, नरेला में है. दिल्ली में रोजाना करीब 10100 मीटिक टन कूड़ा निकलता है, जिसे इन्हीं लैंडफिल साइट पर डाला जाता है. इन लैंडफिल साइट पर कचरा प्रदूषण का कारण बनता है, जिससे पूरे इलाके में बदबू फैलती ही और बिमारी की वजह भी बनती है. लैंडफिल साइट पर कचरे से बिजली बनाने का काम भी किया जाता है, लेकिन कूड़े के पूरी तरह से निस्तारण न होने के चलते कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं.
पूर्वी दिल्ली गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 2500 मीट्रिक टन कूड़ा रोज डाला जाता है, यहां 10 मेगावॉट के बिजली संयंत्र में 1200 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण प्रतिदिन होता है. उत्तरी निगम इलाके के भलस्वा लैंडफिल साइट पर 1500 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन डाला जाता है. नरेला-बवाना लैंडफिल साइट पर 2500 मीट्रिक टन कूड़ा डाला जाता है. इसमें से 2000 मीट्रिक टन कूड़े से रोजाना 24 मेगावॉट बिजली बनाई जाती है। शेष 500 मीट्रिक टन कूड़े से खाद बनती हैय
ओखला और तेहखंड की दो लैंडफिल साइट पर 3600 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन डाला जाता है. इसमें से 1800 मीट्रिक टन कूड़े से ओखला लैंडफिल साइट पर 15 मेगावॉट बिजली बनाई जाती है. तेहखंड के लैंडफिल साइट पर कूड़े से 25 मेगावॉट बिजली बनाने के लिए संयंत्र लगाया जा रहा है. दिल्ली की कई अन्य स्थानों पर लैंडफिल साइट प्रस्तावित हैं, लेकिन लोगों के विरोध के चलते बन नहीं पा रही हैं.
कूड़ा फेंकने के लिए नहीं मिल रही जमीन
दिल्ली के लैंडफिल साइट क्षमता से अधिक ऊंचे हो चुके है. सियासत की वजह से नई लैंडफिल साइट के लिए जमीन नहीं मिलती है. जमीन मिलती भी है तो आस-पास रहने वाले लोग विरोध करने लगते हैं. सोनिया विहार लैंडफिल साइट प्रस्तावित है, जो विरोध के चलते नहीं बन गया है. ऐसे में गाजीपुर, भलस्वा और तेहखंड के लैंडफिल साइट पर कूड़ों का पहाड़ खड़ो हो गया है.
दिल्ली में पिछले पांच वर्षो में सफाई को लेकर जितनी सियासत हुई है शायद ही इससे पहले दिल्ली की जनता ने इससे पहले ऐसी स्थिति देखी हो. बीजेपी कहती रही है कि केजरीवाल सरकार ने नगर निगम को पंगु बना रखा है. सरकार ने नगर निगम फंड नहीं दिया, जिसके चलते निगम के कर्मचारियों को वेतन सही समय पर नहीं मिल पाया. केजरीवाल दिल्ली के कूड़ों को लेकर बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि एमसीडी में हार के डर से भाजपा ने अपने ही कार्यकर्ताओं कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी है कि अगर किसी ने एमसीडी चुनाव के दौरान कूड़े का नाम लिया तो उसे पार्टी से निकाल दिया जाएगा.
दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि कूड़े के पहाड़ों पर राजनीति करने नहीं बल्कि उसे खत्म करने की जरूरत है. उन्होंने बताया था कि उनके उपराज्यपाल बनने से पहले लैंडफिल साइटों से कूड़ा हटाने के काम में केवल छह ट्रायल मशीनें लगी थीं, जबकि आज 46 मशीनें लगी हैं. जल्द की 100 महीने हो जाएगी. कूड़े के पहाड़ खत्म भी होंगे और बहुत जल्द इसका असर भी दिखने लगेगा.
वहीं, आगामी एमसीडी चुनाव को देखते हुए जिस तरह से कूड़े के पहाड़नुमा ढेरों के ऊपर सियासत की जा रही है. ऐसे में कूड़े के पहाड़ों का समाधान हो जाए तो दिल्ली के लोगों को काफी बड़ी राहत मिलेगी. ऐसे में देखना है कि शह-मात के खेल में कौन सियासी बाजी मारता है?