scorecardresearch
 

दिल्ली में जनगणना ड्यूटी से इनकार करने पर 142 गेस्ट शिक्षकों की जा सकती है नौकरी

दिल्ली में 142 अतिथि शिक्षकों पर जनगणना ड्यूटी से इनकार करने के आरोप में सेवा समाप्ति की सिफारिश की गई है. जिला मजिस्ट्रेट ने इसे घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता बताया. हालांकि शिक्षकों का कहना है कि संसाधनों की कमी, कम मानदेय और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण वे यह जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ थे. शिक्षक संघ ने कार्रवाई वापस लेने की मांग की है. शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का विषय है, लेकिन विशेष मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा.

Advertisement
X
शिक्षकों का कॉन्ट्रैक्ट 8 मई को खत्म होने वाला है. Photo ITG
शिक्षकों का कॉन्ट्रैक्ट 8 मई को खत्म होने वाला है. Photo ITG

दिल्ली में 142 अतिथि शिक्षकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इन शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने जनगणना का काम करने से मना कर दिया. इसके बाद पुरानी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर उनकी सेवाएं तुरंत खत्म करने की सिफारिश की है.

जिला प्रशासन का कहना है कि 16 अप्रैल को पहले ही शिक्षकों को संदेश भेजकर बताया गया था कि जनगणना का काम जरूरी है और इसमें सहयोग न करने से परेशानी होगी. इसके बावजूद 142 अतिथि शिक्षकों ने यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना है.

'कर्मचारियों पर भी गलत असर पड़ेगा'
प्रशासन का यह भी कहना है कि अगर ऐसी बातों को नजरअंदाज किया गया, तो इससे बाकी कर्मचारियों पर भी गलत असर पड़ेगा, जो अभी जनगणना के काम में लगे हुए हैं. इस मामले पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जनगणना देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम है और इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में विशेष परिस्थितियां होंगी, उन पर सहानुभूति के साथ विचार किया जाएगा.

Advertisement

8 मई को खत्म होने वाला है कॉन्ट्रैक्ट
दूसरी तरफ, संबंधित अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अब तक नौकरी खत्म करने का कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है. दिल्ली सरकारी शिक्षक संघ ने भी इस फैसले का विरोध किया है. संघ के महासचिव अजय वीर ने कहा कि ये सभी शिक्षक वार्षिक अनुबंध पर काम कर रहे हैं, जो 8 मई को खत्म होने वाला है. उनका कहना है कि शिक्षकों ने जानबूझकर काम से इनकार नहीं किया, बल्कि कम वेतन, संसाधनों की कमी और व्यावहारिक दिक्कतों के कारण ऐसा हुआ.

8 साल से नहीं बढ़ी सैलरी
उन्होंने बताया कि पिछले करीब 8 वर्षों से अतिथि शिक्षकों के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. मौजूदा वेतन इतना कम है कि आने-जाने जैसे जरूरी खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है. संघ ने मांग की है कि इन शिक्षकों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई वापस ली जाए, उन्हें नियमित रूप से वेतन मिलता रहे और जनगणना ड्यूटी के लिए अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाए.

शिक्षक संघ का कहना है कि अतिथि शिक्षक पहले से ही अस्थायी नौकरी की स्थिति में काम कर रहे हैं. ऐसे में इतनी कठोर कार्रवाई उनके आर्थिक हालात और मनोबल दोनों पर बुरा असर डाल सकती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement