क्या आप कल्पना कर सकते है कि किसी महिला की उम्र 532 साल होगी? और वो महिला कढ़ाई बुनाई का काम भी करती होगी. यही नही 212 साल की महिला इतनी चुस्त-दुरुस्त है कि वे साइकिल भी चला रही हैं. इतनी उम्रदराज कोई दो-चार नहीं बल्कि तीन हजार से ज्यादा ऐसी महिलाये हैं, जिनकी उम्र ढाई सौ साल से ज्यादा है. यह सब कुछ हो रहा है छत्तीसगढ़ में, जहां ये महिलाएं अपना जीवन यापन कर रही हैं.
मुख्यमंत्री सिलाई, कढ़ाई और साइकिल योजना के तहत अफसरों ने इतनी उम्र दराज महिलाओं को बाकायदा साइकिल और सिलाई मशीनें बांटी, छत्तीसगढ़ सरकार के रिकार्ड में यह सब कुछ दर्ज है.छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साइकल और सिलाई कढ़ाई मशीन वितरण योजना में सरकारी अफसरों ने ऐसा घोटाला किया है कि जिसे देख सुनकर आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे. श्रम विभाग के अंतरगत चलने वाली साइकिल वितरण योजना में अफसरों ने 114 साल की 1452 महिलाओं को साइकिल बांटी.
213 साल की 652 महिलाओं को भी साईकिल वितरित की गई. उम्रदराज महिलाओ को साइकिल देने का सिलसिला यहीं नहीं थमा. 532 साल की करीब 180 महिलाओं को सरकारी अफसरों ने सिलाई मशीनें बांटी. इसका खुलासा आरटीआई के तहत हुआ है. अकेले रायपुर में 5936 महिलाओं को साइकिल बांटी गई, जबकि 8332 महिलाओं को सिलाई मशीने. राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री सिलाई मशीन और साइकिल वितरण योजना ने जबरदस्त जोर पकड़ा था. 2013 में इस योजना में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायत के बाद सरकार ने जरूरतमन्दों को उनकी मनपसंद साइकिल खरीदने के लिए 6500 रुपये प्रति साइकल के दर से भुगतान भी किया. पहले तो श्रम विभाग के अफसर साईकिल और सिलाई मशीन की जानकारी आरटीआई के तहत देने में आना-कानी करते रहे, लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद शिकायत करता को उसे यह जानकारी देनी पड़ी. करीब 2 हजार पन्नों के विवरण में सैकड़ों महिलाओं के नाम और पते एक ही पाये गए. दस्तावेजों को देखने के बाद साफ हो जाता है कि अफसरों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की गंगा को पूरे प्रदेश में बहाया. एक आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया, 'श्रम विभाग में हमने एक आरटीआई लगाई थी कि चुनाव से पूर्व जो सिलाई मशीन और साईकिल बांटी गयी थी वह किस-किस को दी गई. हमें जो आरटीआई से कागज आये उसमे उम्र नहीं था फिर हमने इसकी सीडी मांगी तो उसमे देखकर हैरान हो गए कि एक महिला की उम्र 532 साल है.' मुख्यमंत्री सिलाई मशीन और साइकल वितरण योजना के लिए राज्य सरकार ने 18 से 35 साल की महिलाओं को पात्र माना था, लेकिन अफसरों ने इस उम्र की चंद महिलाओं को ही साइकिल और सिलाई मशीने बांटी, जबकि बड़े पैमाने पर सरकारी फाइलों में बोगस नाम और पते दर्ज कर दिए गए. इस खुलासे के बाद श्रम विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए है. यह घोटाला सन 2013 में हुआ, जब वरिष्ठ बीजेपी नेता चन्द्रशेखर साहू श्रम मंत्री थे.