रायपुर के कई इलाकों में विंटर डायरिया का अटैक हुआ है. इसके वायरस से एक वर्ष से कम उम्र के सैकड़ों बच्चे बीमार हो गए हैं. बताया जा रहा है कि ठंड में कई बच्चे रोटा वायरस की चपेट में आए हैं. सरकारी अस्पतालों में रोजाना चालीस से पचास ऐसे बच्चों का इलाज हो रहा है, जिनका विंटर डायरिया पॉजिटिव पाया गया है. मेडिकल जांच में ऐसे बच्चों के खून में रोटा वायरस पाया गया है.
डाक्टरों ने एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ठण्ड से बचाने की सलाह दी है. उनके मुताबिक सर्दी बढ़ने के चलते रोटा वायरस एक्टिव है. यही नहीं वातावरण में प्रदूषण की वजह से इस वायरस को फलने फूलने का मौक़ा मिल रहा है.
दरअसल रायपुर के चारों ओर औद्योगिग इकाइयां हैं. ज्यादातर औद्योगिग इकाइयां लोहे का उत्पादन करती हैं. इनमें से सबसे खतरनाक सपंज आयरन उधोग है. यहां लोहा बनाने के लिए कोयला और फर्नेस आयल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. इससे निकलने वाला धुंआ दिन भर वातावरण में मौजूद रहता है.
ठण्ड के मौसम में यह धुंआ आसमान की ओर जाने की बजाए जमीनी सतह की ओर आता है. इसके अलावा वातावरण में मौजूद धूल के कणों से भी लोगों को स्वास्थ संबंधी बीमारियां हो रही हैं. वहीं, इस मौसम में ज्यादातर छोटे बच्चे प्रदुषण का शिकार हो रहे है.
रायपुर के तमाम सरकारी और गैर सरकारी असपतालों में रोजाना विंटर डायरिया से ग्रषित 50 नए केस दर्ज हो रहे है. जबकि गैर सरकारी अस्पतालों और निजी डिस्पेंसरी में इलाज कराने वालों का कोई डाटा प्रशासन के पास नहीं है. डॉक्टरों के मुताबिक निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले बच्चों की संख्या सरकारी अस्पतालों से कहीं ज्यादा है. डाक्टरों ने इस मौसम में लोगों को आगाह किया है कि वो एक साल से कम उम्र के बच्चों को घर से बाहर निकालने से बचें.