छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक स्कूल डायरेक्टर और प्रिंसिपल ने छात्रों की वो सरकारी रकम अपनी तिजोरी में डाल ली, जो छात्रों को बतौर छात्रवृत्ति जारी की गई थी. अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग छात्रों को राज्य सरकार हर महीने 300 से लेकर 600 रुपये तक स्कॉलरशिप देती है.
यह स्कॉलरशिप मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों को मिलती है. सरकारी स्कूलों के अलावा उन स्कूलों के छात्रों को भी ये स्कॉलरशिप दी जाती है, जिन्हें सरकारी ग्रांट के लिए चुना गया है.
धमतरी में ऐसे ही सरकारी सहायता से चलने वाले एक स्कूल के डायरेक्टर और प्रिंसिपल ने सरकारी दस्तावेजों में छात्रों को छात्रवृत्ति दिया जाना दर्ज करा दिया. लेकिन हकीकत में वो रकम अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी. प्राथमिक जानकारी में पाया गया कि साल 2012 में 42 लाख रुपये आरोपियों ने हड़प लिया है. हालांकि जांच के बाद छात्रवृति की रकम और भी अधिक बढ़ सकती हैं.
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धमतरी में छात्रवृत्ति के करीब 42 लाख रुपए हड़पने के मामले में पुलिस ने के एल इंस्टीट्यूशनल कॉलेज के पूर्व डायरेक्टर कन्हैया लाल साहू और उनके छोटे भाई पूर्व प्रिंसिपल गोकुल राम साहू को गिरफ्तार कर लिया है.
एस पी कमलेश्वर चंदेल के मुताबिक, 2012 में के एल इंस्टीट्यूशनल कॉलेज के पूर्व छात्र उत्तम सिंह देशमुख ने छात्रवृत्ति भुगतान में गड़बड़ी की शिकायत की थी. प्रशासन ने अधिकारियों की समिति बनाकर जांच कराई. इसमें 2007 से 2010 तक 228 विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी प्रस्ताव बनाकर 41 लाख 58 हजार 560 रुपए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृत कराने की पुष्टि हुई है.
इसके अलावा कई तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर जांच समिति ने FIR की मांग की है. फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस को अंदेशा है कि दो करोड़ के लगभग की सरकारी रकम का हेर-फेर हुआ है. हालांकि अभी जांच अधिकारी तमाम दस्तावेज जुटाने में लगे हैं.