छत्तीसगढ़ पुलिस में जल्द ही किन्नरों की भर्ती होगी. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश को अमलीजामा पहनाया है, जिसमें साल 2014 में एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने ट्रांसजेंडर के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें हर क्षेत्र में समान प्राथमिकता देने का निर्देश दिया था. छत्तीसगढ़ पुलिस में नए साल में लगभग 35 हजार कॉन्स्टेबलों की भर्ती होनी है और इसके लिए तमाम जिलों से प्रस्ताव मंगवाए गए हैं.
पुलिस मुख्यालय में इस बाबत हुई एक बैठक में फैसला लिया गया है कि अगर पुलिस भर्ती शर्तों के मुताबिक शारीरिक व शैक्षणिक प्रक्रियाओं के मापदंडों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें भर्ती में शामिल किया जाए. हालांकि आरक्षण को लेकर इस मामले में पेंच फंस गया है. ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से कोटा तय किया जाए या फिर उन्हें समान अहर्ता होने पर SC,ST,OBC और जनरल श्रेणी के जरिये ही भर्ती किया जाए. इसके लिए पुलिस मुख्यालय कानूनी राय ले रहा है.
छत्तीसगढ़ में 27 में से 18 जिले पूर्ण रूप से नक्सल प्रभावित हैं. नए कॉन्स्टेबलों की भर्ती अलग- अलग जिला पुलिस बल में होगी. ऐसे में माना जा रहा है कि आम पुलिस कर्मियों के साथ ट्रांसजेंडरों को भी नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती का मौका मिलेगा. पुलिस मुख्यालय में पदस्थ ADG पवन देव ने इस बात की पुष्टि की है कि के दिशा निर्देशों के मुताबिक पुलिस भर्ती में ट्रांसजेंडरों को शामिल करने के लिए फैसला लिया गया है. हालांकि इस मामले में आगे ज्यादा कुछ कहने से उन्होंने इंकार कर दिया.
उधर छत्तीसगढ़ की पहली ट्रांसजेंडर रायगढ़ जिले की मेयर मधु ने इसे प्रगतिशील फैसला बताया है. उन्होंने कहा है कि ट्रांसजेंडरों के लिए पृथक होना चाहिए. उनके मुताबिक निर्धारित भर्ती संख्या में पुरुष महिला के अनुपात के अनुसार ही किन्नरों के लिए भी आरक्षण हो.
एक जानकारी के मुताबिक ट्रांसजेंडर की उम्र, शारारिक बनावट और कद काठी को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले कानूनी राय ली जाएगी. उन्हें फिजिकल टेस्ट पास करना होगा. इसके आधार पर ही उनकी भर्ती को मान्य किया जाएगा. छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने तमिलनाडु और राजस्थान पुलिस मुख्यालय से संपर्क किया है. इन दोनों राज्यों में ट्रांसजेंडरों की भर्ती बतौर पुलिस कर्मी के रूप में की गई है.