सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को जमानत दे दी है. सौम्या चौरसिया छत्तीसगढ़ के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद है. कोर्ट ने कहा कि सौम्या चौरसिया पहले ही डेढ़ साल जेल में गुजार चुकी है. इस मामले में उनके सह आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है. जबकि अभी तक आरोप भी नहीं तय हुए हैं. ऐसी स्थिति में किसी भी आरोपी को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता. लिहाजा हम अंतरिम तौर से जमानत पर रिहाई का आदेश दे रहे हैं. जमानत की शर्त ट्रायल कोर्ट तय करेगा.
इन शर्तों पर जमानत
पहली शर्त है कि वह ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होती रहेंगी. दूसरी शर्त है कि उनका पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट के पास जमा रहेगा. तीसरी शर्त है कि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और अपने प्रभाव का इस्तेमाल भी नहीं करेंगी. आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने भी सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया था, जिसके बाद सौम्या ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की डबल बेंच ने यह जमानत दी है. बेंच ने इसे लेकर भी ऐतराज जताया कि उन्हें किस आधार पर 1 साल 9 महीने तक जेल में रखा गया और जमानत क्यों नहीं दी गई, जबकि मामले में 3 अन्य सह आरोपियों को जमानत भी मिली है. हालांकि सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने ED की ओर से तर्क दिया कि वह प्रभावशाली पद पर थीं जो प्रकरण को प्रभावित कर सकती थीं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और सशर्त जमानत मंजूर कर दी.
एक समय वह छत्तीसगढ़ की सबसे ताकतवर नौकरशाह बन गई थी. भले ही वह छोटे कैडर की अफसर थी. लेकिन उनकी इस ताकत पर ग्रहण तब लगा, जब वे ED के रडार पर आईं.