कभी बस्तर का नाम आते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था. यहां सिर्फ गोलियों की आवाज और नक्सली हिंसा की तस्वीरें ही दिखती थीं. लेकिन अब बस्तर के हालात बदल रहे हैं. यहां धीरे-धीरे विकास और भरोसे की एक नई कहानी लिखी जा रही है. इसी बदलते दौर के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बहुत बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अपने बस्तर दौरे पर साफ कहा कि वह 'सीना तानकर कह सकते हैं कि भारत अब नक्सल-मुक्त हो चुका है'.
बस्तर के नेतानार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने आम लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अब समय सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि सेवा और विकास का है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी लोग जाने से भी डरते थे, वहां अब सरकार की योजनाएं और सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं. इस खास मौके पर उन्होंने सुरक्षा बलों के कैंप में बने एक अनोखे 'जन सेवा केंद्र' का उद्घाटन भी किया और इसे बदलते बस्तर के लिए एक नया मॉडल बताया.
उन्होंने याद दिलाया कि 21 जनवरी 2024 को सरकार ने संकल्प लिया था कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त किया जाएगा. गृह मंत्री ने इसे सिर्फ सुरक्षा अभियान की सफलता नहीं, बल्कि देश की सामूहिक इच्छाशक्ति की जीत बताया. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद असली काम अब शुरू हुआ है.
गृह मंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह बड़ी लड़ाई किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि हमारे सुरक्षाबलों के लंबे संघर्ष और उनके बलिदान की जीत है. उन्होंने जंगलों में रहकर मोर्चा संभालने वाले डीआरजी (DRG) और कोबरा बटालियन के जवानों की खुलकर सराहना की. शाह अनुसार, हमारे इन्हीं बहादुर जवानों की दिन-रात की मेहनत का नतीजा है कि आज बस्तर में हालात पूरी तरह बदल पाए हैं.
सुरक्षा से सेवा तक बदल रहा बस्तर का मॉडल
इस दौरान अमित शाह ने आगे बताया कि अब बस्तर में सुरक्षा कैंपों को धीरे-धीरे 'जन सेवा केंद्र' में बदला जाएगा. इसके तहत करीब 200 में से 70 कैंपों को इस बदलाव के पहले चरण में शामिल किया गया है. इन केंद्रों के जरिए स्थानीय लोगों को एक ही जगह पर तमाम सरकारी योजनाएं, शिक्षा, कौशल विकास और अन्य जरूरी सेवाएं मिल सकेंगी. अब तक जिन जगहों को लोग केवल सुरक्षा के नजरिए से देखते थे, वे अब विकास और जनसेवा का बड़ा केंद्र बनेंगी. इन केंद्रों का नाम 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा रखा जाएगा, ताकि आदिवासी इतिहास और उनके संघर्ष को नई पीढ़ी हमेशा याद रख सके.
अमित शाह ने बस्तर की जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए कहा कि इस इलाके की सबसे बड़ी समस्या लंबे समय तक शिक्षा और विकास की कमी रही है. नक्सलवाद ने इस पूरे क्षेत्र को विकास की दौड़ में काफी पीछे धकेल दिया था, लेकिन अब सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर देकर हालात को तेजी से बदला जा रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि देश की तीन सबसे बड़ी चुनौतियां (कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सलवाद) अब खत्म होने की दिशा में हैं.
अंत में अमित शाह ने सुरक्षाबलों के 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' का भी विशेष रूप से जिक्र किया. उन्होंने साफ कहा कि अगर यह कड़ा अभियान नहीं चलाया गया होता, तो बस्तर में आज यह बड़ा बदलाव कभी संभव नहीं था. अब बस्तर धीरे-धीरे पुराने डर और खौफ से बाहर निकलकर विकास और आपसी भरोसे की एक नई राह पर आगे बढ़ रहा है.