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'तय समय से पहले नक्सलवाद मुक्त हुआ देश', अमित शाह ने थपथपाई सुरक्षा बलों की पीठ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि देश से नक्सलवाद को तय समय सीमा से पहले खत्म कर दिया गया है. उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान को इसका श्रेय दिया. उन्होंने कहा कि अब बस्तर समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई शुरुआत होगी.

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए. (Photo: PTI)
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए. (Photo: PTI)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के शौर्य, साहस और सर्वोच्च बलिदान की बदौलत देश से नक्सलवाद को तय समय सीमा 31 मार्च 2026 से पहले ही पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अमित शाह ने कहा, 'नक्सल मुक्त भारत अभियान में कुछ तारीखें ऐतिहासिक महत्व रखती हैं. 13 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार के शपथ लेने के साथ ही नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का निर्णायक अभियान शुरू हुआ था.'

उन्होंने कहा कि दूसरी अहम तारीख 24 अगस्त 2024 थी, जब सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) की बैठक बुलाकर 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था. अमित शाह ने कहा, 'तीसरी तारीख 31 मार्च 2026 थी, जो केंद्र सरकार की तय समयसीमा थी. लेकिन सुरक्षा बलों के पराक्रम और बलिदान के कारण नक्सलवाद को तय समय से पहले ही समाप्त कर दिया गया.' गृह मंत्री ने कहा कि कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने भी नक्सलवाद खत्म करने में केंद्र सरकार का सहयोग किया, लेकिन छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित मदद नहीं की.

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में बीजेपी सरकार बनने के बाद ही बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव हो सकी. अमित शा​ह ने कहा कि कुछ बुद्धिजीवी वर्षों से यह तर्क देते रहे कि विकास न पहुंचने की वजह से नक्सलवाद फैला, लेकिन सच्चाई इसके उलट है. शाह ने कहा, 'नक्सलवाद की वजह से ही विकास इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाया. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग राशन कार्ड, मुफ्त अनाज योजना और पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी सरकारी सुविधाओं से वंचित रहे. रोजगार के अवसर भी वहां नहीं पहुंच पाए.'

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यह भी पढ़ें: खौफ से निकलकर विकास की राह पर... अमित शाह की चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक आखिर बस्तर में ही क्यों?

उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे इलाके हैं जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से भी अधिक पिछड़े थे, लेकिन वहां नक्सलवाद नहीं था, इसलिए वे धीरे-धीरे विकास की राह पर आगे बढ़ गए. जबकि बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाके हिंसा और भय के कारण विकास से दूर रह गए. गृह मंत्री ने कहा कि 19 मई 2026 के बाद अब वही क्षेत्र, जो कभी नक्सलवाद की चपेट में थे, व्यापक विकास की नई तस्वीर पेश करेंगे. उन्होंने बस्तर क्षेत्र में शुरू की जा रही विकास योजनाओं की भी जानकारी दी.

अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने बस्तर संभाग को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए करीब 200 सुरक्षा कैंप स्थापित किए थे0 इनमें से लगभग 70 कैंपों को अब 'वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' में बदला जाएगा. उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य पूरे बस्तर क्षेत्र को सेवा और विकास से जोड़ना है. यहां प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) बनाई जाएंगी और गांवों में डेयरी स्थापित की जाएगी. शाह ने कहा कि हर आदिवासी महिला डेयरी में दूध ला सकेगी. सहकारी मॉडल के तहत प्रत्येक आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने दूध की देशभर में मार्केटिंग कर सकें.

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उन्होंने कहा कि जंगलों से मिलने वाले लघु वनोपज को भी सहकारी मॉडल से जोड़ा जाएगा, जिससे उसका पूरा लाभ आदिवासी समुदाय तक पहुंचे. गृह मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 'बस्तर पंडुम' कार्यक्रम शुरू किया है. अमित शा​ह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएं बनाने का आह्वान किया था. उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत आदिवासी संस्कृति के विभिन्न आयामों- नृत्य, गीत, भाषा, पारंपरिक वेशभूषा, खानपान और हस्तशिल्प को बड़ा मंच दिया गया है. अब तक दो बार 'बस्तर ओलंपिक' आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 3.94 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया. इनमें बड़ी संख्या में वे पूर्व नक्सली भी शामिल थे, जिन्होंने सरकार की पुनर्वास योजना को स्वीकार किया है.

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