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Beat Report: बस्तर में नए अध्याय की शुरुआत, गृह मंत्री अमित शाह करेंगे विकास मॉडल 2.0 का ऐलान

कभी नक्सली हिंसा और बारूदी सुरंगों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर को अब केंद्र सरकार 'नक्सल मुक्त और विकास युक्त' मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी में है. इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 और 19 मई को बस्तर दौरे पर रहेंगे, जहां वो 'बस्तर विकास मॉडल 2.0' की दिशा में कई अहम योजनाओं और बैठकों में शामिल होंगे.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर जाएंगे और 'नक्सल मुक्त, विकास युक्त बस्तर' मॉडल पेश करेंगे. (Photo: ITG/@GFX)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर जाएंगे और 'नक्सल मुक्त, विकास युक्त बस्तर' मॉडल पेश करेंगे. (Photo: ITG/@GFX)

छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए जाना जाता था, अब तेजी से बदलती तस्वीर पेश कर रहा है. जिन इलाकों में कभी बंदूक और डर का माहौल था, वहां अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करने की योजनाएं आकार ले रही हैं. केंद्र सरकार अब बस्तर को 'नक्सल मुक्त और विकास युक्त' मॉडल क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसी रणनीति के तहत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 18 और 19 मई को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे.

संसद में 30 मार्च को 'नक्सल मुक्त भारत' की घोषणा के बाद यह गृह मंत्री का पहला बस्तर दौरा होगा. सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और नक्सल नेटवर्क पर दबाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार अब 'बस्तर विकास मॉडल 2.0' के जरिए क्षेत्र में विकास आधारित नई रणनीति लागू करने जा रही है. इसका उद्देश्य केवल नक्सलवाद का खात्मा नहीं, बल्कि बस्तर को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है. करीब चार दशक तक बस्तर नक्सली हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा. दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर और कोंडागांव जैसे जिले लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे. सड़क निर्माण, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी परियोजनाएं नक्सलियों के निशाने पर रहती थीं. 

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति, स्थानीय पुलिस की सक्रिय भागीदारी और केंद्र-राज्य समन्वय ने हालात बदलने शुरू कर दिए हैं. अब सरकार 'सुरक्षा के साथ विकास' की रणनीति पर काम कर रही है. अमित शाह का यह दौरा इसी बदलाव का बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है. केंद्र सरकार यह दिखाना चाहती है कि बस्तर अब केवल ऑपरेशन और मुठभेड़ों का इलाका नहीं, बल्कि देश के विकास मानचित्र का अहम हिस्सा बनने जा रहा है.

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डायल-112 के नए वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे

गृह मंत्री 18 मई को रायपुर से अपने कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे. सुबह वो पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के परेड ग्राउंड में डायल-112 के नए वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे. माना जा रहा है कि इससे छत्तीसगढ़ में आपातकालीन पुलिस प्रतिक्रिया प्रणाली और मजबूत होगी, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में. इसके बाद अमित शाह बस्तर के नेतानार पहुंचेंगे, जहां वे जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन करेंगे. यह परियोजना बस्तर के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की सीधी पहुंच स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. इस केंद्र के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, आवास, पेंशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने की योजना है. जिन इलाकों में कभी सरकारी कर्मचारी जाने से डरते थे, वहां अब डिजिटल और प्रशासनिक सेवाओं का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना का लाभ कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, जगदलपुर और आसपास के कई इलाकों को मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का सबसे बड़ा आधार प्रशासनिक पहुंच और भरोसे का निर्माण होता है और जन सुविधा केंद्र इसी सोच का हिस्सा है. गृह मंत्री अपने दौरे के दौरान जगदलपुर स्थित अमर वाटिका में नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि भी देंगे. पिछले कई वर्षों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी के कई जवानों ने नक्सल विरोधी अभियानों में जान गंवाई है. बताया जा रहा है कि अमित शाह शहीद परिवारों से मुलाकात कर सकते हैं और सुरक्षा बलों के जवानों से संवाद भी करेंगे.

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बादल अकादमी में 'बस्तर के संग' का आयोजन

इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों और स्थानीय लोगों के साथ संवाद भी माना जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें कई हार्डकोर कैडर भी शामिल रहे हैं. सरकार अब पुनर्वास नीति के जरिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश कर रही है. 18 मई की शाम जगदलपुर की बादल अकादमी में 'बस्तर के संग' लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होगा. सरकार इसे बस्तर की आदिवासी संस्कृति, लोक कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने की कोशिश के रूप में देख रही है.

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 19 मई को जगदलपुर में होने वाली केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक मानी जा रही है. इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल होंगे. बैठक में राज्यों के बीच समन्वय, आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती इलाकों के विकास, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. सड़क, स्वास्थ्य, संचार और शिक्षा परियोजनाओं की समीक्षा भी की जा सकती है.

'सुरक्षा से विकास' का राष्ट्रीय मॉडल होगा बस्तर

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केंद्र सरकार अब बस्तर को 'सुरक्षा से विकास' के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है. जिस तरह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर रणनीति बनाई गई, उसी तरह बस्तर में भी नई नीति पर काम किया जा रहा है. आने वाले समय में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, इंटरनेट कनेक्टिविटी और पर्यटन से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की संभावना जताई जा रही है. राजनीतिक रूप से भी यह दौरा अहम माना जा रहा है. केंद्र सरकार इस संदेश को मजबूत करना चाहती है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक चरण में है और सरकार का फोकस विकास आधारित स्थायी समाधान पर है. लंबे समय तक हिंसा और असुरक्षा झेल चुके बस्तर को अब 'विश्वास, विकास और स्थिरता' के नए मॉडल के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है.

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