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नीतीश कुमार ने बिहार में खेला महादलित कार्ड, जीतन राम मांझी को बनाया अपना उत्‍तराधिकारी

जीतन राम मांझी बिहार के नए मुख्‍यमंत्री होंगे. मांझी मौजूदा सरकार में एससी/एसटी कल्‍याण मंत्री हैं. नीतीश कुमार ने इस फैसले का औपचारिक ऐलान किया.

जीतन राम मांझी जीतन राम मांझी

जीतन राम मांझी बिहार के नए मुख्‍यमंत्री होंगे. मांझी मौजूदा सरकार में एससी/एसटी कल्‍याण मंत्री हैं. नीतीश कुमार ने इस फैसले का औपचारिक ऐलान किया. सोमवार शाम नीतीश कुमार, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव व प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ मांझी राजभवन पहुंचे और राज्यपाल डी़ वाई़ पाटील से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. राजभवन से लौटने के बाद शरद यादव ने कहा कि मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा. सीएम चुने जाने के बाद जीतन ने कहा, 'मैंने सीएम का पद नहीं मांगा था. सोचा नहीं था कि सीएम बनूंगा. नीतीश के रोडमैप को आगे बढ़ाने का काम करूंगा.'

महादलित समुदाय से ताल्‍लुक रखने वाले मांझी फिलहाल मखदूमपुर से विधायक हैं. साल 1980 में सियासत में कदम रखने वाले मांझी 1983 में पहली बार मंत्री बने थे. 2008 से नीतीश सरकार में मंत्री रहे जीतन राम इस बार गया (सुरक्षित) सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़े थे लेकिन चुनाव हार गए.

मजदूर से मंत्री तक का सफर
जीतन राम ने बाल मजदूरी से जीवन की शुरुआत की, फिर दफ्तारों में क्लर्की करते-करते विधायक और मंत्री बने. महादलित मुसहर समुदाय से आने वाले जीतन राम मांझी का जन्म बिहार के गया जिले के महकार गांव में एक मजदूर परिवार में 6 अक्टूबर 1944 को हुआ. पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण खेतिहर मजदूर पिता ने उन्हें जमीन मालिक के यहां काम पर लगा दिया. वहां मालिक के बच्चों के शिक्षक के प्रोत्साहन और पिता के सहयोग से सामाजिक विरोध के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरू की. उन्होंने सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई बिना स्कूल गए पूरी की.

बाद में उन्होंने हाई स्कूल में दाखिला लिया और 1962 में सेकेंड डिवीजन से मैट्रिक पास किया. 1966 में गया कॉलेज से इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की. परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए आगे की पढ़ाई रोक कर उन्होंने एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क की नौकरी शुरू कर दी और 1980 तक वहां काम किया. उसी वर्ष नौकरी से इस्तीफा देने के बाद वह राजनीति से जुड़ गए.

बिहार में दलितों के लिए उन्होंने विशेष तौर पर काम किया. उनके प्रयास से दलितों के लिए बजट में खासा इजाफा हुआ. वर्ष 2005 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए बिहार सरकार का बजट 48 से 50 करोड़ रुपये का होता था, जो कि 2013 में 1200 करोड़ रुपये का हो गया. वर्ष 2005 में बिहार का जितना संपूर्ण बजट हुआ करता था, आज उतना सिर्फ दलित समुदाय के लिए होता है.

नीतीश कुमार को उम्मीद है कि महादलित समुदाय से आने वाले मांझी के मुख्यमंत्री बनने से इस समुदाय का फिर से उन्हें समर्थन मिलेगा.

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शनिवार को नीतीश ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे बिहार के राज्यपाल डीवाई पाटिल द्वारा मंजूर कर लिया गया था. हालांकि, नीतीश ने विधानसभा भंग नहीं करने की सिफारिश की थी. 2009 के लोकसभा चुनाव में 20 सीटें जीतने वाली जेडीयू इस बार मोदी लहर में ढेर हो गई. पार्टी सिर्फ 2 सीटें ही जीत सकी.

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