बिहार में नीतीश कुमार ने एक बार फिर बड़ा सियासी खेला कर दिया है. इस खेले की वजह से एक तरफ बिहार में बीजेपी को सत्ता से बेदखल होना पड़ गया है तो वहीं दूसरी तरफ आरजेडी को फिर संजीवनी मिल गई है. इस सियासी उलटफेर ने पूरे विपक्ष को कई संकेत दिए हैं. मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने उन्हीं संकेतों पर विस्तार से बात भी की.
तेजस्वी ने जोर देकर कहा है कि जो जनता के सवाल को लेकर लड़ता है, जो जनता के मुद्दे उठाता है, जनता सिर्फ उसे ही स्वीकार करती है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर विपक्ष भी दूसरे राज्यों में जनता के मुद्दे उठाएगी तो बीजेपी को हराना आसान हो जाएगा. वहीं एक बार फिर नीतीश कुमार से हाथ मिलाने पर भी तेजस्वी ने अपनी राय रखी है.
उनके मुताबिक लोकतंत्र को बचाने के लिए और बिहार की जनता की सेवा करने के लिए हम लोग साथ आए हैं. वे कहते हैं कि हमने लोकतंत्र बचाने के लिए ये निर्णय लिया है. हमारे पुरखों को विरासत कोई और नहीं ले जाएगा. सब लोग चाहते थें कि भाजपा का एजेंडा बिहार में नही चलने देना है. हमलोग समाजवादी लोग हैं. हमारे पुरखों को विरासत कोई और ले जाएगा क्या
अब तेजस्वी ने इस तर्क के जरिए कहा है कि एक बार फिर चाचा और भतीजा एक साथ आ गए हैं. बीच में झगड़े जरूर हुए, लेकिन अब फिर वे दोनों जनता की सेवा के लिए साथ आ गए हैं. उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें देश का सबसे अनुभवी मुख्यमंत्री बता दिया है. इस सब के अलावा आरजेडी नेता ने बीजेपी पर आरोप लगा दिया कि कई स्थानीय पार्टियों को खत्म करने की साजिश की जा रही है. पंजाब में अकाली के साथ ऐसा किया गया, महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ और बिहार में भी ऐसी ही साजिश की जा रही थी.
मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने भी कहा है कि वे अब महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार की जनता की सेवा करने वाले हैं. उन्हें इस बात का भी अफसोस है कि 2017 में उन्होंने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया था. लेकिन अब वे एक नई शुरुआत की बात कर रहे हैं. वे तेजस्वी के साथ मिलकर बिहार के विकास पर जोर देना चाहते हैं.
इस नई सरकार में किसे क्या मंत्रालय मिलेगा, अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया गया है. अटकलें चल रही हैं कि तेजस्वी को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है और गृह विभाग भी उन्हीं के पास जा सकता है. कांग्रेस की तरफ से भी दो से तीन मंत्रालयों की मांग रख दी गई है.