बिहार में छात्राओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए मांझी सरकार ने एक नई घोषणा की है. प्रदेश सरकार नई मेधावृति योजना के तहत 12वीं की परीक्षा में फर्स्ट डिविजन करने वाली सभी छात्राओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 25 हजार रुपये देने वाली है. मंगलवार को मानव विकास मिशन की 7वीं राज्यस्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने निर्णय किया.
योजना के तहत 12वीं की परीक्षा में फर्स्ट डिविजन करने वाली सभी छात्राओं को 25 हजार रुपये और एससी-एसटी की वैसी जातियों जिनका साक्षरता दर 30 फीसदी से कम है की छात्राओं को सेकेंड डिविजन लाने पर भी 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. गौरतलब है कि बिहार में मेधावृति योजनान्तर्गत मैट्रिक पास करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को दस हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है.
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न इस बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा और योजना व विकास विभाग के सचिव पंकज कुमार ने संयुक्त रूप से इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि एससी-एसटी के छात्रों को 75 फीसदी की उपस्थिति नहीं रहने पर भी छात्रवृत्ति दी जाएगी. एससी-एसटी के बच्चों के छात्रवृत्ति में 75 फीसदी उपस्थिति की बैरियर को समाप्त कर दिया गया है. ब्रजेश महरोत्रा ने बताया कि मानव विकास मिशन की राज्यस्तरीय सुनवाई समिति की सात समितियां और 19 मानव विकास सूचकांक निर्धारित है. इस मिशन में पांच साल तक की अवधि यानी 2013 से 2017 के लिए रोडमैप बनाया गया है.
उन्होंने बताया कि सूचकांक और बजट के संबंध में टारगेट व फंड का निर्धारण किया गया है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुल 23,856 करोड़ रुपये, शिक्षा के क्षेत्र में 1,37,224 करोड़ रुपये, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण के क्षेत्र में 18,399 करोड़ रुपये, कौशल विकास के क्षेत्र में 1,585 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. ब्रजेश ने बताया कि शिशु बाल मृत्यु दर में बिहार राष्ट्रीय औसत के करीब है. यह दर 2017 में राष्ट्रीय औसत से कम हो जाएगी. बाल विवाह की दर में कमी लाने के लिए हर पंचायत में हाई स्कूल खोला जाएगा. लिंग अनुपात में बिहार में एक हजार पुरुष पर महिलाओं की संख्या 918 है.
इसके साथ ही कुपोषण दूर करने के लिए तीन साल तक के बच्चों के लिए अलग से पोषाहार की व्यवस्था की जा रही है. छह माह तक के बच्चों को केवल मां के दूध पर ही रखा जाए, इसक लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. पैदा होने के बाद से 36 महीने तक की उम्र के बच्चों को पूर्ण आहार मिले इसकी व्यवस्था की जा रही है. ब्रजेश ने कहा कि प्रत्येक परिवार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 50 लाख शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है. सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरक्षर महिलाओं को भी डिजिटल साक्षर बनाने के लिए 3 करोड़ टेबलैट वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है. बैठक में संबंधित विभागों के मंत्री और अधिकारी उपस्थित थे.